बीएचयू विधि संकाय में विवाद, एसोसिएट प्रोफेसर ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड सदस्य पर धमकी और अभद्रता का लगाया आरोप
वाराणसी। बीएचयू के विधि संकाय में एक विवाद सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक माहौल में हलचल मच गई है। विधि संकाय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार मालवीय ने विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड के एक सदस्य पर अभद्र व्यवहार, धक्कामुक्की और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने विधि संकाय के अधिष्ठाता (डीन) को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मंगलवार को विधि संकाय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। बैठक समाप्त होने के बाद किसी मुद्दे को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई। डॉ. मालवीय का आरोप है कि इस दौरान प्रॉक्टोरियल बोर्ड के संबंधित सदस्य ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, अपशब्द कहे और धक्कामुक्की करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
डॉ. मालवीय ने अपनी शिकायत में कहा है कि विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि शिक्षकों के साथ इस प्रकार की घटनाएं होती हैं तो इससे न केवल उनकी सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगता है, बल्कि पूरे शैक्षणिक वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस प्रकार का व्यवहार अनुशासन और गरिमा के अनुरूप नहीं है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय परिसर में कानून-व्यवस्था, अनुशासन और सुरक्षा बनाए रखना है। ऐसे में यदि बोर्ड के किसी सदस्य पर ही इस प्रकार के आरोप लगते हैं तो यह विश्वविद्यालय की आंतरिक व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता का विषय है। डॉ. मालवीय ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करने तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी अपील की है।
फिलहाल इस मामले में बीएचयू प्रशासन, विधि संकाय के डीन अथवा प्रॉक्टोरियल बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रशासन क्या निर्णय लेता है, इस पर शिक्षकों और छात्रों की नजर बनी हुई है। जांच पूरी होने तक शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और परिसर में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

