NSUI कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई और हाउस अरेस्ट को कांग्रेस नेताओं ने बताया असंवैधानिक, बोले, किसी को नजरबंद करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ 

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रिपोर्ट-ओमकारनाथ 
 
वाराणसी।
मोदी सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर “जी राम जी” किए जाने के विरोध में मार्च निकाल रहे एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई और कांग्रेस नेताओं को हाउस अरेस्ट किए जाने को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा। इसे असंवैधानिक और लोकतंत्र की भावना के खिलाफ बताया। कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्य एवं धरौल के पूर्व विधायक मोहन प्रकाश ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। 

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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कांग्रेस कार्यकर्ताओं और एनएसयूआई के छात्रों को हाउस अरेस्ट किया जा रहा है, वह किसी भी तरह से लोकतांत्रिक नहीं है। जब कांग्रेस की सरकार थी, तब इस तरह किसी को बिना किसी विरोध या प्रक्रिया के हाउस अरेस्ट नहीं किया गया। यदि किसी को गिरफ्तार करना है तो संविधान और कानून के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए। किसी को उसके घर में नजरबंद कर देना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।

मोहन प्रकाश भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रणनीतिकार माने जाते हैं। वे वर्तमान में कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य होने के साथ-साथ पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। उनके बयान के बाद इस मुद्दे ने और राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। 


  
बीएचयू के एनएसयूआई कार्यकर्ता राणा रोहित ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को कमजोर और खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। राणा रोहित के अनुसार मनरेगा के माध्यम से लगभग 38 प्रतिशत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को रोजगार मिलता है, जबकि कई राज्यों में महिलाओं की भागीदारी 85 प्रतिशत से भी अधिक है। यह योजना गरीब और वंचित वर्गों को सीधे लाभ पहुंचाती रही है।

राणा रोहित ने बताया कि इसी मुद्दे को लेकर 11 जनवरी को बीएचयू गेट से प्रधानमंत्री कार्यालय तक मार्च निकालने का आह्वान किया गया था, ताकि सरकार से इस बदलाव को लेकर जवाब मांगा जा सके। लेकिन सरकार की ओर से जवाब देने के बजाय पुलिस बल प्रयोग किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट हुई, धक्का-मुक्की की गई और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। इसके बाद प्रशासन द्वारा कार्यकर्ताओं के घरों पर जाकर दबाव बनाया जा रहा है।

राणा रोहित ने सवाल उठाया कि क्या सरकार प्रतिरोध की आवाज को दबाकर लोकतंत्र को ही निलंबित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर सवाल उठाने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार छीना जाएगा, तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए गंभीर खतरा होगा।

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