मनरेगा खत्म कर मोदी सरकार ने गांधी की वैचारिक हत्या की, कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने सरकार को घेरा
वाराणसी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में उपनेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने मनरेगा को खत्म कर महात्मा गांधी की वैचारिक हत्या कर रही है। यह टिप्पणी उन्होंने कांग्रेस महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी के जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में आयोजित पत्रकार वार्ता में की।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना थी, जिसे एक कानून का संरक्षण प्राप्त था। मोदी सरकार ने छलपूर्वक इस योजना को समाप्त कर दिया, जो राष्ट्रपिता के नाम से जुड़ी एक ऐतिहासिक योजना थी। उन्होंने कहा कि 1947 के बाद शायद किसी ने यह नहीं सोचा था कि देश में ऐसी सरकार आएगी जो गांधी जी के नाम वाली योजना को ही खत्म कर देगी।
उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत हर वर्ष लगभग 12 करोड़ ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाता था। इस कानून की आत्मा ‘गारंटीकृत आजीविका सुरक्षा’ थी, ताकि कोई भी गरीब परिवार भूख और बेरोजगारी के कारण निराश न हो। यूपीए सरकार के कार्यकाल में सोनिया गांधी की प्रेरणा से तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यह कानून सर्वसम्मति से पारित हुआ था, जो ग्रामीण गरीबों के लिए वरदान साबित हुआ।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि पहले केंद्र सरकार मनरेगा में 90 प्रतिशत और राज्य सरकारें 10 प्रतिशत अंशदान देती थीं, लेकिन अब कर्ज में डूबे राज्यों पर 40 प्रतिशत का बोझ डाल दिया गया है, जबकि केंद्र केवल 60 प्रतिशत योगदान करेगा। उन्होंने इसे गरीब विरोधी और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मनरेगा को समाप्त कर मोदी सरकार ने देश की राजनीति में एक काला अध्याय लिखा है। उन्होंने संकल्प लिया कि कांग्रेस इस “काले कानून” को हटाकर रहेगी और यदि भविष्य में कांग्रेस की सरकार बनती है तो मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाएगा।
उन्होंने आगामी 100 दिनों के लिए कांग्रेस के कार्यक्रमों की भी घोषणा की। इसमें संविधान संवाद महापंचायत, “मनरेगा बचाओ संग्राम”, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाताओं के नाम जुड़वाने का अभियान, पंचायत चुनाव 2026 की तैयारी, कांग्रेस स्थापना के 140 वर्ष को सेवा और बलिदान वर्ष के रूप में मनाना, एमएलसी चुनाव की मजबूती से तैयारी तथा रमाबाई अंबेडकर मैदान में महारैली शामिल हैं।

