बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे सीएम योगी, बोले- संकट की घड़ी में सरकार आपके साथ
सलारपुर के राहत शिविर में मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से किया संवाद, राहत सामग्री बांटी; 1131 किसानों की फसल क्षति का लिया संज्ञान
बाढ़ प्रभावित 16 वार्डों के 567 परिवारों को राहत, 48 नावें सेवा में लगीं; मकान गिरने, आकाशीय बिजली और सर्पदंश को आपदा में शामिल कर 24 घंटे में चार लाख रुपये की सहायता का निर्देश
16 वार्डों में 567 परिवार बाढ़ से प्रभावित, राहत एवं बचाव के लिए 48 नावें लगाई गईं
1131 किसानों की फसल क्षतिग्रस्त, आपदा प्रभावित परिवारों को 24 घंटे में चार लाख रुपये की सहायता
बेघर परिवारों को आवास योजना का लाभ देने के निर्देश, राहत शिविर में 26 प्रकार की सामग्री उपलब्ध
बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव कराया जाएगा, मुख्यमंत्री ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों से की बातचीत
वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वाराणसी पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण और सलारपुर स्थित विद्याविहार इंटर कॉलेज में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं और उन्हें राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों से बातचीत कर शिविर में मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और संकट की इस घड़ी में पूरी सरकार उनके साथ खड़ी है।

राहत सामग्री वितरण के बाद मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वरुणा नदी में बैकफ्लो के कारण निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में सरकार द्वारा किए गए कार्यों के कारण प्रदेश में बाढ़ से प्रभावित जिलों की संख्या में कमी आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन और पार्टी कार्यकर्ता युद्धस्तर पर राहत कार्य में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि राहत शिविर में बच्चों को दूध और फल के साथ अनाज, बाल्टी, मग, बिस्किट, नमक, तौलिया, तेल सहित 26 प्रकार की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। बाढ़ प्रभावित किसानों की फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा देने के निर्देश दिए गए हैं। मकान गिरने, आकाशीय बिजली और सर्पदंश जैसी घटनाओं को भी आपदा में शामिल करते हुए प्रभावित परिवारों को 24 घंटे के भीतर चार लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। बेघर हुए लोगों को प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी आज नई काशी के रूप में अपने नए कलेवर को संजो रही है। काशी विश्वनाथ धाम, घाट, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, एयरपोर्ट, सड़क चौड़ीकरण और रिंग रोड जैसी परियोजनाओं ने काशी को नई पहचान दी है। उन्होंने बताया कि जिले के 16 वार्डों में 567 परिवार प्रभावित हैं और 48 नावों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है। चिकित्सा सुविधा के लिए आयुष्मान कार्ड दिए जा रहे हैं। वहीं, 1131 किसानों की फसल क्षतिग्रस्त हुई है। पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में उचित छिड़काव कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बीमारियों का प्रसार न हो।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी जग्गू राम मौर्य की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय सरकार जनता के दरवाजे पर खड़ी रहती है। इस दौरान जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. अवधेश सिंह, त्रिभुवन राम, जिलाध्यक्ष रामशकल पटेल, मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, सीडीओ प्रखर कुमार समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

