वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा चिदानंद विद्यालय, सैकड़ों बटुकों ने धारण किया नया यज्ञोपवीत
वाराणसी। श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर शुक्रवार को कर्णघंटा स्थित चिदानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में श्रावणी उपाकर्म का भव्य आयोजन किया गया। चिदानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं गुर्जर छात्र समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों बटुकों ने वैदिक विधि-विधान के साथ श्रावणी उपाकर्म संस्कार संपन्न किया और नया यज्ञोपवीत धारण किया।
कार्यक्रम आचार्य विशाल पांडे के आचार्यत्व में संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बटुकों को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की प्रक्रिया से कराया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पंचद्रव्य स्नान से हुई। इसके बाद पंचामृत स्नान, भस्म स्नान, वेद पूजा सहित विभिन्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। विधिवत पूजन-अर्चन के बाद बटुकों को नया यज्ञोपवीत धारण कराया गया।

एक साथ सैकड़ों बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रों का उच्चारण किए जाने से विद्यालय परिसर का वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक हो उठा। कार्यक्रम में मौजूद आचार्यों और विद्वानों ने श्रावणी उपाकर्म तथा यज्ञोपवीत के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कार व्यक्ति को अनुशासन, कर्तव्य और आत्मशुद्धि की दिशा में प्रेरित करते हैं।
श्रावणी पूर्णिमा पर प्रायश्चित और आत्मशुद्धि की परंपरा का भी निर्वहन किया गया। वैदिक विधान के अनुसार बटुकों और उपस्थित लोगों ने संकल्प लेकर वर्षभर में जाने-अनजाने हुई त्रुटियों के लिए प्रायश्चित किया। हेमाद्रि संकल्प के माध्यम से भूलों के निवारण और जीवन में धार्मिक अनुशासन बनाए रखने का संकल्प लिया गया।
आचार्य विशाल पांडे ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म केवल यज्ञोपवीत बदलने का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संकल्प और वैदिक जीवन मूल्यों को अपनाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतरता जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल शास्त्री ने की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए बच्चों और युवाओं को संस्कारों से जोड़ना आवश्यक है। धार्मिक और वैदिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन परंपराओं को करीब से समझ सकती है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बटुकों के साथ आचार्य, विद्वान, ब्राह्मण समाज के लोग, विद्यालय परिवार और श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन और धार्मिक अनुष्ठानों से विद्यालय परिसर आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर रहा।

