चेतगंज की नक्कटैया : लक्ष्मण ने काटी शूर्पणखा की नाक, बारिश के बीच निकले लाग विमान और आकर्षक झांकियां, छाता-रेनकोट पहनकर पहुंचे श्रद्धालु
मूसलाधार बारिश भी नहीं डिगा सकी काशीवासियों की आस्था, नक्कटैया में आधी रात गूंजे जय श्रीराम के जयकारे
वाराणसी। आसमान से बरसती मूसलाधार बारिश, सड़कों पर पानी और हाथों में छाते... लेकिन काशीवासियों का उत्साह ऐसा कि मौसम भी उनकी आस्था के आगे फीका पड़ गया। गुरुवार की रात काशी के प्रसिद्ध नक्कटैया मेले में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। बारिश की बूंदों के बीच हजारों की संख्या में लोग इस ऐतिहासिक लीला के साक्षी बनने पहुंचे। किसी के हाथ में छाता था तो कोई रेनकोट पहनकर परिवार के साथ मेले का आनंद लेने निकला था। बारिश लगातार होती रही, लेकिन न तो लोगों के कदम रुके और न ही जयकारों की गूंज थमी।

रात करीब 10:30 बजे जैसे ही लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटने की लीला का मंचन किया, पूरा क्षेत्र जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। लोगों ने तालियां बजाकर लीला का स्वागत किया। इसके बाद बारिश के बीच लाग विमान और आकर्षक झांकियां निकाली गईं। रोशनी से सजे विमानों और झांकियों को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ जुटी रही।

अंग्रेजों के खिलाफ विरोध का बना था माध्यम
नक्कटैया मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक है। स्थानीय लोगों के अनुसार, अंग्रेजी हुकूमत के दौर में इस लीला को अंग्रेजों के खिलाफ विरोध जताने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया था। धार्मिक आयोजन की आड़ में अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनभावनाओं को अभिव्यक्ति मिलती थी। अंग्रेज चाहकर भी इस परंपरा को रोक नहीं पाए। तभी से यह आयोजन लगातार होता आ रहा है।

समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन नक्कटैया मेले को लेकर काशीवासियों का उत्साह आज भी बरकरार है। गुरुवार की रात बारिश ने जहां आम जनजीवन की रफ्तार धीमी कर दी थी, वहीं नक्कटैया में आस्था, परंपरा और उत्सव का रंग और गहरा नजर आया। छातों के नीचे खड़े बच्चे, रेनकोट पहने बुजुर्ग और झांकियों की एक झलक पाने को उत्सुक युवा इस बात की गवाही दे रहे थे कि काशी के लिए नक्कटैया महज मेला नहीं, बल्कि विरासत और भावनाओं से जुड़ा उत्सव है।




