बीएचयू छात्रसंघ बहाली आंदोलन को चंद्रशेखर आजाद का समर्थन, नगीना सांसद ने सोशल मीडिया पोस्ट कर छात्रसंघ चुनाव कराने की उठाई मांग, धरनारत छात्रों का बढ़ा उत्साह
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने को अब राजनीतिक समर्थन मिलने लगा है। नगीना से सांसद और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद (रावण) ने छात्रसंघ बहाली आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से बीएचयू समेत देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव फिर से शुरू कराने की पैरवी की। सांसद के समर्थन की जानकारी मिलने के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों में उत्साह देखा जा रहा है। धरनारत छात्रों ने उनके प्रति आभार जताते हुए इसे आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण समर्थन बताया।
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने अपने संदेश में विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने छात्रसंघ को विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की आवाज बुलंद करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया। छात्रसंघ के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं उठाने, प्रशासन के सामने अपनी बात रखने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर मिलता है।
छात्रों ने कहा- छात्रसंघ विद्यार्थियों की आवाज
सांसद के समर्थन पर प्रतिक्रिया देते हुए धरनारत छात्र शिवांश और सत्यम ने कहा कि छात्रसंघ केवल चुनाव कराने की व्यवस्था नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सामूहिक आवाज का प्रतिनिधित्व करने वाला मंच है। इसके माध्यम से छात्र अपनी शैक्षणिक, प्रशासनिक और परिसर से जुड़ी समस्याओं को संगठित तरीके से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि छात्रसंघ की अनुपस्थिति में विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं और मांगों को प्रभावी ढंग से उठाने में कठिनाई होती है। चुनाव बहाल होने से छात्रों को अपना प्रतिनिधि चुनने और विश्वविद्यालय की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिलेगा। छात्रसंघ विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास का भी माध्यम है।
बहाली तक जारी रहेगा अनिश्चितकालीन धरना
छात्रसंघ बहाली संघर्ष समिति, बीएचयू ने सांसद चंद्रशेखर आजाद के समर्थन के लिए उनका आभार जताया। समिति से जुड़े छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व की बहाली के लिए है।
छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए जाते, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ की बहाली से विश्वविद्यालय प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच संवाद का एक मजबूत माध्यम फिर से स्थापित हो सकेगा।


