BHU में 33 पेड़ों की कटाई का मामला, NGT की ₹2.65 करोड़ पेनल्टी की वसूली की उठी मांग
वाराणसी। बीएचयू परिसर में 33 बहुमूल्य पेड़ों की अवैध कटाई का मामला एक बार फिर गरमा गया है। छात्र प्रतिनिधियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले में जिम्मेदारी तय करने और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से बरकरार रखी गई ₹2.65 करोड़ की पेनल्टी की वसूली जिम्मेदार लोगों से करने की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित लापरवाही का आर्थिक बोझ विश्वविद्यालय के बजट या छात्रों की फीस पर नहीं डाला जाना चाहिए।
छात्र प्रतिनिधियों की ओर से प्रशासन को सौंपे जाने वाले मांग पत्र में कहा गया है कि पेड़ों की कटाई के मामले में जिन अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा संबंधित ठेकेदारों की भूमिका जांच में सामने आए, उनकी जिम्मेदारी तय की जाए। छात्रों ने मांग की है कि नियमों के तहत दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों से व्यक्तिगत वसूली (Personal Recovery) की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि सार्वजनिक धन पर इसका अतिरिक्त भार न पड़े।

निष्पक्ष विभागीय जांच की मांग
छात्र प्रतिनिधियों ने मामले की तत्काल निष्पक्ष आंतरिक विभागीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के दौरान पेड़ों की कटाई से जुड़े आदेश, अनुमति प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और ठेकेदारों की जिम्मेदारी की विस्तार से पड़ताल की जाए। जांच में दोष सिद्ध होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मांग पत्र में उत्तर प्रदेश प्रोटेक्शन ऑफ ट्रीज एक्ट, 1976 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की लागू धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की मांग भी की गई है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने की पहल करने की मांग की है।

पेड़ों की जियो-टैगिंग पर जोर
छात्रों ने भविष्य में परिसर में पेड़ों की अवैध कटाई जैसी घटनाओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण पेड़ों की जियो-टैगिंग और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कराने का सुझाव दिया है। साथ ही नियमित निगरानी, पेड़ों की कटाई के लिए पारदर्शी अनुमति व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की मांग की गई है।
छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि BHU केवल शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि महामना की पर्यावरणीय और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा परिसर है। ऐसे में विश्वविद्यालय की प्राकृतिक संपदा और हरियाली की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने NGT पेनल्टी, जिम्मेदारी तय करने, व्यक्तिगत वसूली, FIR और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े बिंदुओं पर प्रशासन से लिखित कार्रवाई की मांग की है।

