कारागार में जन्मे जगत के पालनहार, गूंजा जय कन्हैया लाल की हाथी घोड़ा पालकी, झांकियों में साकार हुईं लीलाधर की लीलाएं
वाराणसी। ऊंची दीवारों, बंद दरवाजों और कड़े सुरक्षा पहरे के बीच शुक्रवार को वाराणसी का केंद्रीय कारागार श्रीकृष्ण की भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर नजर आया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कारागार कर्मियों और बंदियों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन तथा उनकी विभिन्न लीलाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां प्रस्तुत कीं। इन झांकियों को देखने पहुंचे लोग बंदियों की कला, कल्पनाशीलता और रचनात्मकता से प्रभावित नजर आए।

जेल परिसर में प्रवेश करते ही वातावरण में भक्ति और शांति का अहसास हुआ। परिसर में कहीं भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का दृश्य साकार किया गया था तो कहीं गोकुल की बाल लीलाओं और वृंदावन की मनोहारी छटा को झांकियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े अलग-अलग प्रसंगों को आकर्षक ढंग से सजाकर प्रस्तुत किया गया। मंदिर की विशेष सजावट ने आयोजन की भव्यता में और इजाफा किया।

झांकियों का अवलोकन करने पहुंचीं दिशा नेवाल ने कहा कि जेल परिसर के भीतर का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक लगा। उन्होंने बताया कि बंदियों ने श्रीकृष्ण के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को अलग-अलग झांकियों के जरिए जीवंत रूप दिया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के जीवन के बारे में किताबों में पढ़ा था और कल्पना की थी, लेकिन बंदियों ने अपनी कला के माध्यम से जिस तरह उनकी लीलाओं को साकार किया, वह बेहद सराहनीय है।

पहली बार झांकियां देखने पहुंचीं श्रुति सागर ने भी बंदियों की रचनात्मकता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्म से लेकर गोकुल और वृंदावन की लीलाओं तक को अलग-अलग झांकियों में सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया। मंदिर की सजावट और पूरे परिसर की प्रस्तुति भी मनमोहक रही। केंद्रीय कारागार में आयोजित जन्माष्टमी समारोह धार्मिक उत्सव के साथ बंदियों की सकारात्मक सोच और रचनात्मक प्रतिभा का भी परिचायक बना। झांकियों के जरिए जेल की दीवारों के भीतर से भक्ति, प्रेम और मानवता का संदेश बाहर तक पहुंचता दिखाई दिया।



