सामनेघाट में नाव लगाने को नाविकों में मारपीट, पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट पीड़ित पक्ष ने किया प्रदर्शन, बोले, मुकदमा दर्ज होने के बावजूद नहीं मिला न्याय
वाराणसी। लंका थाना क्षेत्र के सामनेघाट में नाव लगाने को लेकर हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामला दर्ज होने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। इसी के विरोध में शनिवार को बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
पीड़ित पक्ष के गौतम कुमार साहनी ने बताया कि वह ग्राम मदरवां, थाना लंका के निवासी हैं। उनके अनुसार, 2 जनवरी को दोपहर लगभग 12 बजे वह अपने साथियों के साथ सामनेघाट स्थित जजेज गेस्ट हाउस के पास नाव लगाकर यात्रियों की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान एक ग्राहक से बातचीत के समय रामनगर निवासी नाविक बबलू साहनी वहां पहुंचा और सामनेघाट पर नाव लगाने का विरोध करने लगा। विरोध के कारण कहासुनी बढ़ गई और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई।

आरोप है कि विवाद के दौरान वहां मौजूद करीब 20 लोगों ने रामानंद नामक युवक पर जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया। इस हमले में रामानंद के दोनों हाथ टूट गए और सिर पर गंभीर चोट लगने से वह बेहोश हो गया। घटना की सूचना मिलते ही उसके परिजन और आसपास के 8 से 10 लोग मौके पर पहुंचे। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इसके बाद बबलू साहनी, मनोज और कल्लू ने अपने साथियों को फोन कर बुलाया।
आरोप लगाया कि कुछ ही देर में रामनगर से करीब 70 से 80 नाविक मौके पर पहुंचे और लाठी-डंडों से पीड़ित पक्ष पर हमला कर दिया। इस हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पीड़ितों और उनके परिजनों का आरोप है कि सत्तापक्ष के दबाव में रामनगर के नाविकों का पक्ष लिया जा रहा है और पुलिस पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब उन्होंने सुलह से इनकार किया, तो उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करा दिए गए और कुछ लोगों को थाने बुलाकर घंटों बैठाया गया, जबकि मुख्य आरोपियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। धरना-प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों की संख्या में पुरुष और महिलाएं शामिल रहीं। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर निष्पक्ष जांच, दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ितों को सुरक्षा देने की मांग की। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में जल्द निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

