आंखों पर पट्टी, मन में गणपति... चंद सेकंड में उकेर देते हैं बप्पा की तस्वीर

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35 वर्षों से कला साधना में जुटे विजय कुमार, गणेश भक्ति को बनाया जीवन का संकल्प

20-30 सेकंड में गणेश की आकृति उकेरने की क्षमता, गणेश महोत्सव में बनाएंगे 108 चित्र 

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुकी है कला, काशी के 56 विनायकों के बनाए चित्र

देश के विभिन्न हिस्सों में लग चुकी हैं पेंटिंग की प्रदर्शनियां, ‘काशी रत्न’ सम्मान से भी हो चुके हैं सम्मानित

स्पेशल रिपोर्ट - ओमकार नाथ

वाराणसी। काशी में भक्ति और कला का संगम सदियों पुराना है। यहां आराधना के अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं। इसी परंपरा को अपनी अनोखी चित्रकला के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं अस्सी क्षेत्र निवासी प्रसिद्ध मूर्तिकार एवं चित्रकार विजय कुमार। भगवान गणेश के अनन्य भक्त विजय आंखों पर पट्टी बांधकर महज कुछ सेकंड में कागज या कैनवास पर गणपति की आकृति उकेर देते हैं। उनकी यह कला देखने वालों के लिए कौतूहल के साथ भक्ति का अनुभव भी कराती है।

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आंखें बंद... हाथों में कला और मन में गणपति
गणेश पूजा के अवसर पर जब काशी के मंदिरों और घरों में विघ्नहर्ता की आराधना हो रही है, विजय कुमार के लिए चित्रकारी ही गणपति पूजा का माध्यम बन जाती है। आंखों पर पट्टी बांधकर वे मन ही मन गणेश मंत्र का जाप करते हैं और ध्यान में अपने आराध्य की छवि रखकर कैनवास पर उनकी आकृति उकेरते हैं।

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विजय बताते हैं कि उनके लिए चित्रकारी केवल कला नहीं, बल्कि साधना है। कई बार एक चित्र तैयार करने में एक-दो मिनट लगते हैं तो कभी महज 20 से 30 सेकंड में गणेश की आकृति तैयार हो जाती है। वे इसे अपनी उपलब्धि नहीं, बल्कि भगवान गणेश की कृपा मानते हैं।

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बचपन से ही मूर्तिकला और चित्रकारी का जुनून
विजय कुमार के परिवार में कई पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण की परंपरा रही है। पत्थरों को तराशकर मूर्तियां बनाने के साथ उन्होंने बचपन से चित्रकारी में भी रुचि ली। शुरुआत में वे खुली आंखों से चित्र बनाते थे। बाद में भतीजे की ओर से आंखों पर पट्टी बांधकर चित्र बनाने की चुनौती मिली। विजय ने इसे स्वीकार किया और लगातार अभ्यास के बाद बंद आंखों से गणेश की आकृति बनाने में दक्षता हासिल कर ली।

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108 चित्रों से शुरू करते हैं गणेश महोत्सव
गणेश महोत्सव के पहले दिन 108 चित्र बनाने का विशेष संकल्प विजय कुमार के लिए आराधना का हिस्सा है। चित्र बनाते समय वे गणेश मंत्र का जाप करते हैं और प्रत्येक चित्र को अपने आराध्य को समर्पित करते हैं। उनके अनुसार, जैसे भक्त 108 मनकों की माला से भगवान का स्मरण करते हैं, वैसे ही वे 108 चित्रों के माध्यम से गणपति का ध्यान करते हैं।

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लिम्का बुक में दर्ज है अनोखी कला
विजय कुमार बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन के करीब 35 वर्ष चित्रकला को समर्पित किए हैं। बंद आंखों से लाखों से अधिक भगवान गणेश की पेंटिंग बनाने का दावा करते हुए वे कहते हैं कि जब तक बप्पा की इच्छा होगी, तब तक उनकी यह कला साधना जारी रहेगी। काशी की गलियों में जहां गणपति के जयकारे गूंज रहे हैं, वहीं विजय कुमार की उंगलियां कैनवास पर गणपति की आकृति उकेरकर भक्ति का अनूठा स्वरूप प्रस्तुत कर रही हैं। उनके लिए रंग और रेखाएं केवल चित्र बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि भगवान गणेश के चरणों में अर्पित कला-अंजलि हैं।

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BK Pathak
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Veerkeshwar Pathak Journalist Veerkeshwar Pathak, who entered the field of journalism in 2015, has nearly a decade of experience in print and digital media. He holds a postgraduate diploma in journalism and has established his reputation through reporting at prestigious media outlets like Amar Ujala, Hindustan, and Dainik Jagran. He has a special interest and expertise in reporting on political and social issues, news analysis, and editing, along with eventful news. He currently serves as an editor at Live VNS, a leading digital news platform in Varanasi. In this role, he is contributing to reshaping digital journalism and delivering important information to readers through factual and reliable news. Factual investigation of news and effective editing are key aspects of his journalism.

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