सदस्यता अभियान से यूपी में अपनी छवि सुधारेगी भाजपा, लोकसभा चुनाव की गलतियों से सीख लेकर विधानसभा के लिए कमर कसेंगे पदाधिकारी

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वाराणसी। लोकसभा चुनाव में यूपी में मिली करारी हार के बाद भाजपा शीर्ष नेतृत्व अब विधानसभा चुनाव को लेकर एक्टिव मोड में है। यूपी में कम सीटें मिलने पर भाजपा अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। शीर्ष नेतृत्व ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।


बीते दिनों लखनऊ में हुई बैठक के दौरान इस बात के संकेत मिले हैं कि अगस्त से पार्टी अपना नया सदस्यता अभियान शुरू करेगी। सक्रिय सदस्य बनाए जाने के बाद संगठन में बदलाव की कवायद भी शुरू हो जाएगी। भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष के नेतृत्व में हुई बैठक में तय हुआ कि सक्रिय सदस्य बनाने के बाद संगठनात्मक फेरबदल के तहत पहले मंडल कमेटी, फिर बूथ कमेटी, शक्ति केंद्र और सेक्टरवार कमेटियों की कमियों को दूर किया जाएगा। यानी निष्क्रिय पदाधिकारियों की जगह युवा व सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। 

यूपी में होने वाले उपचुनाव से पहले सभी कमेटियों को दुरुस्त कर लिया जाएगा। इसके बाद जिले और प्रदेश के संगठन में बदलाव किए जा सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि पार्टी का शीर्ष प्रबंधन अब दलितों को जोड़ने का बड़ा प्लान बना रहा है। बैठक में बताया गया कि लोकसभा चुनाव में बसपा से छिटके दलितों के आरक्षण खत्म होने और संविधान में बदलाव होने का भ्रम विपक्ष की ओर से फैलाने के बाद से उसका फायदा सपा- कांग्रेस गठबंधन को मिला है। इस पर गहरी नजर रखते हुए नाराज दलितों को पार्टी से जोड़ने की कवायद शुरू करने की आवश्यकता है। 

बैठक में भाग लेने वालों की मानें तो राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष को सामने पाकर पदाधिकारियों ने लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाबत जमकर भड़ास निकाली। राष्ट्रीय महामंत्री को पार्टी नेताओं ने हार के कारण बताए। क्षेत्रीय अध्यक्षों और महामंत्रियों ने हार को लेकर जमकर गुबार निकाला। पदाधिकारियों ने कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं की सुनी नहीं जाती।

प्रत्याशियों से नाराजगी हार की एक मुख्य वजह

प्रत्याशियों से जनता में नाराजगी थी और सुनना हमारे कार्यकर्ताओं को पड़ता था। पार्टी में शामिल कराए गए विपक्षी दलों एवं सामाजिक संगठनों के लोगों को चुनाव के दौरान कोई जिम्मेदारी सौंपी नहीं गयी। राष्ट्रीय महामंत्री ने इन कमियों को स्वीकार किया और कहा कि इसमें सुधार होना चाहिए। इस पर अब ध्यान दिया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय महामंत्री संगठन को पदाधिकारियों ने बताया कि प्रत्याशियों ने अपनी छवि सुधारने का काम नहीं किया। वे तो मोदी और योगी के नाम पर चुनाव लड़े और यह मान बैठे थे कि उनके भरोसे चुनाव जीत जायेंगे। इसी के तहत कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गयी। इतना ही नहीं, विपक्ष के फैलाए गए झूठ को काटने की कवायद न करने और प्रत्याशियों को दोहराने का भी खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा है। 

इसके अलावा युवाओं की नाराजगी भी पार्टी के लिए भारी पड़ गयी। प्रशासनिक एवं पुलिस पुलिस विभाग के अफसर ही नहीं, थानेदार तक कार्यकर्ताओं को तवज्जों नहीं दिए। इस कारण से कार्यकर्ताओं में उदासीनता घर गयी और चुनाव के दौरान वे घर से नहीं निकले। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन ने पदाधिकारियों की सभी बातों को गंभीरता से सुना और उसमें सुधार करने का आश्वासन दिया। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने कहा कि कार्यकर्ताओं का मनोबल किसी कीमत पर टूटने नहीं दिया जाएगा।

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