ट्रांसपोर्ट नगर प्रकरण में बड़ा अपडेट : अधिवक्ताओं की वीडीए उपाध्यक्ष से मुलाकात, दूर हुईं गलतफहमियां
वाराणसी। ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना को लेकर चल रहे विवाद के बीच शनिवार को एक अहम घटनाक्रम सामने आया। किसानों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने विकास प्राधिकरण (वी़डीए) के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा से मुलाकात की। इस बैठक में कोर्ट के स्थगन आदेश को लेकर मौजूद गलतफहमियों को दूर किया गया। चर्चा के बाद उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हर हाल में पालन किया जाएगा और जहां स्टे है, वहां कोई कार्रवाई नहीं होगी।

क्या बोले उपाध्यक्ष
वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने स्पष्ट किया कि ट्रांसपोर्ट नगर योजना को लेकर स्थगन आदेश की स्थिति को लेकर कुछ भ्रम था, जिसे बैठक के दौरान दूर किया गया। उन्होंने बताया कि जिन परिवारों की अराजी में 31 मई 2023 के बाद अवार्ड घोषित हुआ है, उन संपत्तियों पर न्यायालय का स्थगन आदेश प्रभावी है और वहां किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि 31 मई 2023 से पहले जिन मामलों में अवार्ड पारित हो चुका है, उन पर फिलहाल कोई स्टे लागू नहीं है। उपाध्यक्ष ने कहा कि विकास प्राधिकरण न्यायालय के आदेशों का पूर्ण सम्मान करेगा और उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
चर्चा के बाद उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों का हर हाल में पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन संपत्तियों पर स्थगन आदेश प्रभावी है, वहां किसी प्रकार की ध्वस्तीकरण या निर्माण संबंधी कार्रवाई नहीं की जाएगी। वहीं, जिन मामलों में कोई स्टे लागू नहीं है, वहां नियमानुसार परियोजना का कार्य पूर्ववत जारी रहेगा। उन्होंने दोहराया कि विकास प्राधिकरण न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही आगे की प्रक्रिया अपनाएगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई विस्तृत बातचीत
अधिवक्ता विनय शंकर राय ‘मुन्ना’ ने बताया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में किसानों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वीडीए उपाध्यक्ष से बातचीत की। उन्हें अवगत कराया गया कि जिन परिवारों ने मुआवजा नहीं लिया है, उनकी संपत्तियों पर स्पष्ट रूप से स्थगन आदेश लागू है।
बैठक के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कुछ तथ्यों को लेकर भ्रम की स्थिति थी, जिसे विस्तार से समझाया गया।

उपाध्यक्ष ने स्वीकार की स्थिति, दिया पालन का आश्वासन
वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश प्रसाद सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर को सुप्रीम कोर्ट ने भी यथावत रखा है। इस तथ्य को विस्तार से रखने के बाद उपाध्यक्ष ने सहमति जताई कि न्यायालय के आदेश का अक्षरशः पालन किया जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जिन संपत्तियों पर स्टे है, वहां किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण या निर्माण संबंधी कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल ने बैठक को सकारात्मक और संतोषजनक बताया।
अराजियत और याचिकाकर्ताओं को लेकर था भ्रम
बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि अराजियत और पिटिशनर को लेकर कुछ गलतफहमियां थीं। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि कोर्ट के आदेश के दायरे में आने वाली संपत्तियों पर किसी भी तरह की कार्रवाई अवमानना की श्रेणी में आ सकती है।

इसपर उपाध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना किसी भी स्थिति में नहीं होने दी जाएगी।
अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि भविष्य में कोर्ट के आदेश के विपरीत कोई कदम उठाया गया तो उसे कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट माना जाएगा।

फिलहाल इस मुलाकात के बाद स्थिति स्पष्ट हुई है और दोनों पक्षों ने कानून के दायरे में आगे बढ़ने पर सहमति जताई है।
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