मणिकर्णिका घाट को लेकर AI-जनरेटेड तस्वीरों से भ्रम फैलाने पर बड़ी कार्रवाई, 8 मुकदमे दर्ज

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वाराणसी। मणिकर्णिका घाट के सुंदरीकरण कार्य को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर AI-जनरेटेड तस्वीरें और भ्रामक सूचनाएं फैलाने के मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में थाना चौक पर 8 अलग-अलग अभियोग पंजीकृत किए गए हैं। पुलिस ने 8 व्यक्तियों और संबंधित X हैंडल को नामजद करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 298, 299 और 353 के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं।

AI जनरेटेड तस्वीरों से फैलाया गया भ्रम
पुलिस के अनुसार मणिकर्णिका घाट के सुंदरीकरण कार्य से जुड़ी वास्तविक स्थिति के विपरीत सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें और सामग्री साझा की गई, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं को दिखाकर आमजन की धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया गया। इन पोस्टों के जरिए न सिर्फ लोगों को भ्रमित किया गया, बल्कि समाज में आक्रोश और वैमनस्य फैलाने की कोशिश भी की गई।

जिन 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उनमें आशुतोष पोट्निस, संजय सिंह, पप्पू यादव, जसविंदर कौर, प्रगन्या गुप्ता, मनीष सिंह, रितु राठौर और संदीप देव के नाम शामिल हैं।

कंपनी की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
इस पूरे प्रकरण में Mano पुत्र Pachamal, निवासी वी. सेतुराजापुरम, थाना पेरूनाला, जनपद रामनाथपुरम (तमिलनाडु) ने शिकायती प्रार्थना पत्र दिया है। शिकायत में बताया गया कि उनकी कंपनी 15 नवंबर 2025 से मणिकर्णिका घाट पर स्थापना सुविधाओं को सुदृढ़ करने और सुंदरीकरण का कार्य कर रही है। इसी दौरान उन्हें सोशल मीडिया X हैंडल के माध्यम से यह जानकारी मिली कि घाट पर चल रहे कार्य को लेकर असत्य, निराधार और भ्रामक सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं।

X हैंडल पर पोस्ट कर भड़काने का आरोप
शिकायत के अनुसार X हैंडल यूजर Ashutosh Potnis (@daksinapathpati) द्वारा 16 जनवरी 2026 की रात करीब 10:02 बजे मणिकर्णिका घाट के सुंदरीकरण कार्य से जुड़ी भ्रामक तस्वीरें और पोस्ट साझा की गईं। इन पोस्टों में वास्तविक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया और हिंदू देवी-देवताओं में आस्था रखने वाले लोगों को भ्रमित किया गया। इससे समाज में आक्रोश फैलने और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की स्थिति उत्पन्न हुई।

सरकार को लेकर आपत्तिजनक तुलना का आरोप
पुलिस के अनुसार पोस्ट में भारत सरकार की तुलना विदेशी आक्रांता औरंगजेब से की गई, जिससे सरकार में आस्था रखने वाले लोगों में रोष उत्पन्न हुआ। इसके बाद X हैंडल पर बड़ी संख्या में आपत्तिजनक टिप्पणियां और री-पोस्ट सामने आए, जबकि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

री-पोस्ट और टिप्पणी करने वाले भी जांच के दायरे में
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल मूल पोस्ट करने वाले ही नहीं, बल्कि भ्रामक सामग्री को री-पोस्ट करने और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए स्क्रीनशॉट्स को साक्ष्य के रूप में केस डायरी में शामिल किया गया है।

कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मणिकर्णिका घाट जैसे संवेदनशील और धार्मिक स्थल को लेकर अफवाह फैलाना गंभीर अपराध है। इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर भी असर पड़ता है। इसी कारण मामले में गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी जारी
पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसी भी प्रकार की अफवाह, AI-जनरेटेड फर्जी तस्वीरें या भ्रामक सूचना फैलाने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। आमजन से अपील की गई है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।

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