मांगों पर अड़े बीएचयू छात्र, चौथे दिन सुंदरकांड का पाठ, चीफ प्रॉक्टर को हटाने समेत सात सूत्रीय मांगों को लेकर केंद्रीय कार्यालय पर धरना जारी

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वाराणसी। बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) से जुड़े छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा। आंदोलन के चौथे दिन छात्रों ने धरना स्थल पर भगवान श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण कर सुंदरकांड का पाठ किया। छात्रों ने कहा कि उनकी सात सूत्रीय मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन मिलने तक धरना जारी रहेगा।

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छात्र पिछले चार दिनों से केंद्रीय कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर और प्रोक्टोरियल बोर्ड को हटाना तथा छात्रों से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका की जांच कराना शामिल है। इससे पहले बिरला छात्रावास के बाहर भी छात्रों ने धरना दिया था। वहां छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर प्रो. संदीप पोखरिया पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की थी।

सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
आंदोलन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई है। उनका कहना है कि परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रभावी रोक लगाई जाए। संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाने, मधुबन पार्क में निगरानी बढ़ाने तथा परिसर में नशाखोरी पर प्रभावी रोक लगाने की मांग भी की गई है।

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छात्रों ने परिसर में संचालित खाद्य दुकानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और निर्धारित दर सूची प्रदर्शित कराने की मांग रखी है। इसके अलावा सुरक्षाकर्मियों की सेवा शर्तों और वेतन से संबंधित असमानताओं को दूर करने की मांग भी सात सूत्रीय मांगपत्र में शामिल है।

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मुकदमों और कार्रवाई की समीक्षा की मांग
छात्रों ने 12 सितंबर को प्रेक्षागृह आवंटन से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। इसके साथ ही छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों, की गई दंडात्मक कार्रवाई और छात्रावास से डिबार किए जाने जैसे मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की मांग उठाई गई है।

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धरना स्थल पर सुंदरकांड पाठ के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। छात्रों का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। मांगों पर लिखित रूप से सहमति बनने के बाद ही धरना समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।

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