वेंटिलेटर पर बीएचयू की जूनियर डॉक्टर, इंजेक्शन का ओवरडोज लेकर की थी खुदकुशी की कोशिश 

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वाराणसी। बीएचयू के आईएमएस में सर्जरी विभाग की एक जूनियर डॉक्टर पिछले नौ दिनों से आईसीयू में भर्ती हैं। चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन अब तक कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है और लगातार निगरानी की जा रही है। जूनियर डॉक्टर ने इंजेक्शन का ओवरडोज लेकर खुदकुशी की कोशिश की थी। 

13 मार्च को जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने इंसुलिन इंजेक्शन की ओवरडोज लेकर आत्महत्या का प्रयास किया था। घटना के तुरंत बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उनका इलाज लगातार जारी है। वर्तमान में उनका उपचार सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक के छठे तल पर स्थित आईसीयू में किया जा रहा है।

डॉक्टरों का कहना है कि इंसुलिन की अधिक मात्रा का प्रभाव शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ा है, जिसमें किडनी भी शामिल है। इसी कारण उनकी स्थिति जटिल बनी हुई है और विशेष निगरानी की आवश्यकता पड़ रही है। पिछले नौ दिनों के दौरान उनका दो बार डायलिसिस किया जा चुका है, जबकि अन्य आवश्यक जांचें भी नियमित रूप से कराई जा रही हैं, ताकि शरीर के अंगों की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जा सके।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार मरीज के इलाज के लिए विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम बनाई गई है। इस टीम में न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और मेडिसिन समेत पांच विभागों के वरिष्ठ डॉक्टर शामिल हैं। सभी आवश्यक दवाइयां और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, और इलाज में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी जा रही है।

इस घटना के बाद अस्पताल में कार्यरत अन्य जूनियर डॉक्टरों ने कार्य के अत्यधिक दबाव को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि लंबे समय तक लगातार ड्यूटी और मानसिक तनाव जैसे कारण स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इस मामले ने एक बार फिर चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टरों की कार्य-परिस्थितियों और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस छेड़ दी है।

आईएमएस-बीएचयू के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने बताया कि डॉक्टरों की टीम मरीज की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने आश्वस्त किया कि हर संभव जांच और उपचार किया जा रहा है, और मरीज को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

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