बारिश में डूबा बीएचयू अस्पताल, मरीजों की राह बनी मुश्किल, जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय में सोमवार रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद जलनिकासी व्यवस्था की एक बार फिर पोल खुल गई। अस्पताल परिसर और मरीजों के आवागमन वाले रास्तों पर पानी भर जाने से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कई मरीजों को पानी के बीच से होकर ओपीडी तक पहुंचना पड़ा। बारिश के दौरान अस्पताल की व्यवस्था को लेकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी सवाल उठाए और मौके पर पहुंचकर मरीजों की मदद की।

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अस्पताल परिसर में जलभराव की समस्या नई नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान बारिश होते ही कई स्थानों पर पानी जमा हो जाता है। इससे मरीजों के साथ डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और तीमारदार भी प्रभावित होते हैं। सोमवार रात हुई तेज बारिश के बाद भी यही स्थिति देखने को मिली। अस्पताल आने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती परिसर के भीतर सुरक्षित तरीके से पहुंचना रहा।

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छह हजार मरीजों की आवाजाही, फिर भी जलनिकासी पर सवाल
सर सुंदरलाल चिकित्सालय में प्रतिदिन करीब छह हजार मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। पूर्वांचल ही नहीं, आसपास के कई जिलों से भी लोग बेहतर उपचार की उम्मीद में यहां आते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में जलभराव होने से मरीजों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।

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बीमारी से जूझ रहे बुजुर्ग, दिव्यांग, गंभीर मरीज और छोटे बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचे परिजनों को पानी के बीच से रास्ता बनाना पड़ा। कई लोगों के लिए ओपीडी तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया। मरीजों के परिजनों का कहना था कि इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्हें अस्पताल के अंदर तक जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

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पानी में उतरकर मरीजों की मदद
बारिश के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता आशुतोष सिंह इशू अस्पताल पहुंचे। उन्होंने परिसर में जलभराव की स्थिति का जायजा लिया और मरीजों की परेशानी देख अपने साथियों के साथ उनकी मदद की। उनके अनुसार कई मरीज ऐसे थे जो पानी अधिक होने के कारण अकेले ओपीडी तक नहीं पहुंच पा रहे थे।

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उन्होंने बताया कि कहीं पिता अपने बीमार बेटे को लेकर परेशान थे तो कहीं पति अपनी पत्नी को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए रास्ता तलाश रहा था। ऐसे मरीजों और उनके परिजनों को कार्यकर्ताओं ने पानी के बीच से निकालकर ओपीडी तक पहुंचाने में मदद की।

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आशुतोष सिंह इशू ने अस्पताल की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बारिश के मौसम में हर साल इसी तरह की स्थिति सामने आती है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में बदलाव के दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश होते ही वास्तविक स्थिति सामने आ जाती है।

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150 करोड़ के बजट पर भी सवाल
अस्पताल के लिए हर वर्ष करीब 150 करोड़ रुपये के बजट का दावा करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी धनराशि के बावजूद मरीजों को बारिश में मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों परेशान होना पड़ता है। अस्पताल में जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होने को लेकर उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा।

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अस्पताल में मरीजों की भीड़, बेड की कमी, लंबी कतारों, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जलभराव की समस्या मरीजों की मुश्किलों को और बढ़ा देती है।

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हर साल सामने आती है समस्या
मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि बारिश के दौरान जलभराव से सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को होती है जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को पानी के बीच से ले जाना जोखिम भरा हो जाता है। अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में मुख्य मार्ग और ओपीडी तक पहुंचने वाले रास्तों को बारिश के दौरान भी सुगम बनाए रखना जरूरी है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जलभराव की समस्या हर वर्ष सामने आती है तो इसके स्थायी समाधान के लिए अस्पताल परिसर की नालियों, ड्रेनेज सिस्टम और पानी के प्राकृतिक बहाव का तकनीकी सर्वे कराया जाना चाहिए। जरूरत के अनुसार नालियों की क्षमता बढ़ाने और जलनिकासी के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित करने की मांग भी उठ रही है।

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स्थायी समाधान की मांग
मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल बारिश के बाद पानी निकालने की व्यवस्था करने के बजाय ऐसी योजना बनाई जानी चाहिए जिससे पानी जमा ही न हो।

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मांग है कि अस्पताल परिसर की जलनिकासी व्यवस्था की तकनीकी जांच कराकर जलभराव वाले स्थानों को चिह्नित किया जाए। साथ ही उचित ढलान, नालियों की सफाई और पर्याप्त क्षमता वाली ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। बारिश के दौरान मरीजों के सुरक्षित आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग और आवश्यक इंतजाम भी किए जाएं।

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बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में प्रतिदिन हजारों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बारिश के दौरान अस्पताल तक सुरक्षित पहुंच और ओपीडी तक सुगम आवागमन भी स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा है। हर साल दोहराई जा रही जलभराव की समस्या के बीच अब मरीजों और तीमारदारों की नजर इस बात पर है कि अस्पताल प्रशासन इसका स्थायी समाधान कब करता है।

तस्वीरें .... 

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