बीएचयू में कर्मचारियों ने एम्फी थियेटर से सेंट्रल ऑफिस तक निकाला जुलूस, कनिष्ठ लिपिक परीक्षा स्थगित करने समेत अन्य मांगें उठाईं
वाराणसी। बीएचयू में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। सैकड़ों कर्मचारियों ने एमपी थिएटर ग्राउंड में एकत्रित होकर जुलूस निकाला और विश्वविद्यालय के सेंट्रल ऑफिस पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान कनिष्ठ लिपिक परीक्षा स्थगित करने समेत अन्य मांगें उठाईं।
कर्मचारियों ने प्रशासन द्वारा नियमितीकरण के लिए समिति गठन के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे पहले भी कई बार पत्राचार कर चुके थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिसूचना संख्या AB/CW/Regularization/6774 (दिनांक 14/16 मार्च 2026) के तहत तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए समिति गठित की है। कर्मचारियों ने इस पहल के लिए आभार व्यक्त किया, लेकिन साथ ही नई भर्ती प्रक्रिया पर आपत्ति भी जताई।

कर्मचारियों का कहना रहा कि जब तक समिति अपना अंतिम निर्णय नहीं दे देती, तब तक नई भर्तियों को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। उन्होंने विशेष रूप से कनिष्ठ लिपिक के 199 पदों पर प्रस्तावित भर्ती परीक्षा को स्थगित करने की मांग उठाई। विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन संख्या 07/2024-2025 के तहत इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, जिसकी लिखित परीक्षा अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित है।
कर्मचारियों ने चिंता जताई कि यदि नियमितीकरण से पहले ही इन पदों पर नई भर्ती कर ली जाती है, तो लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के हित प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि कई कर्मचारी पिछले 30 से 40 वर्षों से विश्वविद्यालय में सेवा दे रहे हैं, जबकि वर्तमान में कार्यरत अधिकांश कर्मचारी कम से कम 14 वर्षों से जुड़े हैं।

कर्मचारियों ने यह भी कहा कि वे अब पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं, ऐसे में नियमित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से प्रतिस्पर्धा करना उनके लिए कठिन है। इसलिए प्रशासन को उनके अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए पहले नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
कर्मियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की कि नियमितीकरण समिति के अंतिम निर्णय तक कनिष्ठ लिपिक भर्ती परीक्षा को स्थगित रखा जाए, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के साथ न्याय हो सके।

