सावन में शिवभक्ति से सराबोर हुआ बीएचयू, नए विश्वनाथ मंदिर में उमड़ी शिवभक्तों की भीड़
वाराणसी। सावन के पावन माह की शुरुआत के साथ ही बीएचयू का वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया है। विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रसिद्ध श्री विश्वनाथ मंदिर, जिसे नया विश्वनाथ मंदिर अथवा बिड़ला मंदिर के नाम से जाना जाता है, में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ रहा है। सुबह मंगला आरती से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोष से गुंजायमान है। विश्वविद्यालय परिवार के साथ-साथ शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

सावन में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होने के कारण छात्र-छात्राएं, शिक्षक, कर्मचारी और स्थानीय श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में मंगल की कामना के साथ विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर रहे हैं। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। महिलाओं, पुरुषों, छात्रों और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं, जिससे भीड़ का बेहतर प्रबंधन हो सके और दर्शन में किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। विशेष रूप से सावन के सोमवार और अन्य महत्वपूर्ण तिथियों पर संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है।

सफेद संगमरमर से निर्मित श्री विश्वनाथ मंदिर लगभग 76 मीटर (250 फीट) ऊंचा है। बिड़ला परिवार के सहयोग से निर्मित यह भव्य मंदिर विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यद्यपि यह मंदिर काशी के प्राचीन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से अलग है, लेकिन भगवान शिव को समर्पित होने और अपनी अद्भुत स्थापत्य कला के कारण इसे श्रद्धालु समान श्रद्धा के साथ नया विश्वनाथ मंदिर कहते हैं।

यह मंदिर महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की उस दूरदर्शी परिकल्पना का भी प्रतीक है, जिसमें शिक्षा, संस्कृति और अध्यात्म के समन्वय से एक आदर्श विश्वविद्यालय की स्थापना का सपना देखा गया था। बीएचयू परिसर के मध्य स्थित यह मंदिर आज भी उस विचारधारा को जीवंत बनाए हुए है। शांत वातावरण, विशाल शिखर और भव्य वास्तुकला इसे काशी के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों में विशिष्ट स्थान प्रदान करते हैं।

नए विश्वनाथ मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के साथ माता पार्वती, नटराज, श्रीगणेश, मां सरस्वती, पंचमुखी महादेव, हनुमान जी और नंदी सहित अनेक देवी-देवताओं के विग्रह भी स्थापित हैं। इसी कारण श्रद्धालु एक ही परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन कर आध्यात्मिक संतोष प्राप्त करते हैं।

सावन के दौरान बीएचयू का यह मंदिर शिक्षा और अध्यात्म के अनूठे संगम का सजीव उदाहरण बन गया है। एक ओर देश-विदेश से आए विद्यार्थी ज्ञानार्जन में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर शिव आराधना का वातावरण पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहा है। मंदिर के विशाल शिखर के नीचे गूंजता "हर-हर महादेव" का उद्घोष सावन के पावन माह में बीएचयू को शिवभक्ति के रंग में रंग रहा है।





