शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर बीएचयू प्रशासन ने स्पष्ट की स्थिति, शिक्षकों ने 7 अप्रैल को विरोध मार्च का किया ऐलान

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वाराणसी। बीएचयू में शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर चल रही तकरार के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक बार फिर अपना पक्ष स्पष्ट किया। प्रशासन का कहना है कि प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जबकि विश्वविद्यालय निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार ही कार्य कर रहा है। वहीं शिक्षकों ने 7 अप्रैल को विरोध का ऐलान किया है। 

बीएचयू प्रशासन के अनुसार, कई ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने भारत और विदेशों में पोस्ट डॉक्टोरल फेलो के रूप में कार्य किया है, लेकिन उनकी नियुक्तियों की शर्तें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के वर्ष 2018 के दिशानिर्देशों के खंड 10.0 के साथ सीधे तौर पर मेल नहीं खाती हैं। इसी कारण कुछ मामलों में प्रमोशन प्रक्रिया लंबित है।


अगली बैठक में प्रस्तुत होगी समिति की रिपोर्ट
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि ऐसे मामलों की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया था। समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट को बीएचयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल की अगली बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि डायनामिक एश्योर्ड कॅरिअर प्रोग्रेशन स्कीम (डीएसीपीएस) को विश्वविद्यालय में वर्ष 2018 में औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया था। इस योजना के तहत साक्षात्कार वर्ष 2019, 2020 और 2024 में आयोजित किए जा चुके हैं।


कुछ प्रमोशन यूजीसी की मंजूरी पर निर्भर
बीएचयू प्रशासन के अनुसार, जनवरी 2016 से जून 2018 के बीच पे-लेवल 10 से पे-लेवल 11 पर प्रमोशन के कुछ मामलों में अभी भी यूजीसी की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि मंजूरी मिलते ही संबंधित शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

शिक्षकों का विरोध मार्च, बड़ी संख्या में जुटने की तैयारी
दूसरी ओर, शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सीधे संवाद की मांग की है और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। शिक्षकों का कहना है कि कुलसचिव कार्यालय के कई अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल हैं, जिनका जवाब प्रशासन को देना चाहिए।

जानकारी के अनुसार, 7 अप्रैल को लगभग एक हजार शिक्षकों के जुटने का अनुमान है। इस दिन बीएचयू परिसर स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (बीएचयू परिसर) से लंका तक विरोध मार्च निकाला जाएगा। इस प्रस्तावित मार्च को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में हलचल तेज हो गई है और प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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