AI-कोडिंग और साइबर सुरक्षा जैसी आधुनिक विद्याओं में दक्ष होंगे बेसिक शिक्षा के विद्यार्थी 

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कानपुर आईआईटी व सीमेट प्रयागराज से प्रशिक्षण प्राप्त बेसिक शिक्षा विभाग के मास्टर ट्रेनर ने शिक्षकों को दिया प्रशिक्षण 

10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 700 से अधिक  पीएम श्री विद्यालयों एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक हुए प्रशिक्षित 

यह पहल एनईपी 2020 के प्रावधानों के अनुरूप डिजिटल, समावेशी और कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने माना जा रहा महत्वपूर्ण कदम


 वाराणसी। काशी में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी बदलाव की एक नई पहल ने रफ्तार पकड़ ली है। सरकारी विद्यालयों के शिक्षक अब शिक्षा की सिर्फ पारंपरिक पद्धति तक सीमित नहीं रहेंगे। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग के चुनिंदा शिक्षकों को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर एवं सीमेट (राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान) प्रयागराज में विशेष प्रशिक्षण दिया गया। वहां से प्रशिक्षण प्राप्त मास्टर ट्रेनर ने वाराणसी के अन्य शिक्षकों को आईएफपीडी  के माध्यम से एआई, कोडिंग, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटलाइजेशन (डिजिटल शिक्षण योजना) और कंप्यूटर की अन्य विधाओं जैसे गूगल फॉर्म ,OLABS-सिमुलेशन, PhET-सिमुलेशन ,एवं गूगल नोटबुक एलएम ,दीक्षा आदि का उद्देश्यपरक एवं सार्थक उपयोग करते हुए डिजिटल शिक्षण योजना अपनाने का प्रशिक्षण दिया। सरकार बेसिक  स्कूलों के बच्चों को तकनीकी रूप से सक्षम बना रही जिससे वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में दक्ष हो जाए। 

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मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने बताया कि समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत डायट, सारनाथ, वाराणसी में जनपद के सभी विकास खंडों में स्थित पीएम श्री विद्यालयों, उच्च प्राथमिक विद्यालयों, एवं कम्पोजिट विद्यालयों के शिक्षकों हेतु आईसीटी आधारित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) के प्रावधानों के अनुरूप डिजिटल, समावेशी एवं कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि अब तक 700 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। 


 मास्टर ट्रेनर वरुण चतुर्वेदी एवं नीलम राय ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों को आई.एफ.पी.डी, एआई जैमिनी, चैटजीपीटी, नोटबुक एलएम ,दीक्षा ऐप, सिमुलेशन पोर्टल- ओ-लैब (OLab), PhET, Simpop जैसे आधुनिक माध्यमों एवं आईसीटी उपकरणों के प्रभावी संचालन एवं शैक्षणिक उपयोग का विस्तृत एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया है। शिक्षकों को यह भी बताया जा रहा है कि तकनीक के माध्यम से कक्षा शिक्षण को अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण एवं परिणामोन्मुख कैसे बनाया जाए। 

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उन्होंने बताया कि डिजिटल साक्षरता के पाठ्यक्रम को विज्ञान की पुस्तक में जोड़ा गया है, इसलिए विज्ञान के शिक्षकों को और उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को कंप्यूटर में निपुण बनाने हेतु उनको डिजिटल जानकारी प्रदान करना जरूरी है ताकि वह इन सभी कोडिंग कार्यक्रम को बच्चों तक अच्छे से पहुंचाए।

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