जरायम की दुनिया का ‘अदृश्य शूटर’ था बनारसी यादव, नाम था लेकिन चेहरा किसी ने नहीं देखा
वाराणसी। पूर्वांचल के आपराधिक इतिहास में एक लंबे अरसे तक बनारसी यादव ऐसा नाम रहा, जो खौफ तो पैदा करता था, लेकिन जिसकी पहचान रहस्य बनी रही। सुपारी लेकर हत्याएं करने वाला यह शूटर पुलिस की फाइलों में दर्ज था, मगर न उसका स्पष्ट हुलिया था और न ही कोई पुख्ता तस्वीर। यही वजह रही कि कई संगीन वारदातों को अंजाम देने के बावजूद वह वर्षों तक कानून की पकड़ से बाहर रहा और अपराध की दुनिया में ‘अदृश्य शूटर’ के तौर पर कुख्यात हो गया।
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नाम सामने आया, चेहरा फिर भी ओझल रहा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक बनारसी यादव का नाम कई मामलों में सामने आया, लेकिन हर बार वह पर्दे के पीछे ही रहा। शूटर बदल जाते थे, गवाह नहीं मिलते थे और बनारसी खुद कभी मौके पर ज्यादा देर नहीं रुकता था। सारनाथ क्षेत्र में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के बाद पहली बार पुलिस को यह पुख्ता संकेत मिला कि बनारसी यादव सक्रिय रूप से वाराणसी में मौजूद है। इसी वारदात ने उसके अदृश्य रहने के दौर पर विराम की नींव रखी।
मोबाइल से दूरी, लगातार ठिकाने बदलना थी पहचान
सूत्रों का कहना है कि बनारसी यादव कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था। वह न तो सोशल मीडिया पर था और न ही किसी डिजिटल माध्यम से संपर्क करता था। संदेशवाहक, आमने-सामने बातचीत और सीमित भरोसेमंद लोगों के जरिए ही वह अपने संपर्क बनाए रखता था। इसके साथ ही एक जगह टिककर न रहना उसकी सबसे बड़ी रणनीति थी। लगातार ठिकाने बदलना और पहचान छुपाकर रहना उसे पुलिस से एक कदम आगे रखता था।
माफिया नेटवर्क के इशारे पर करता था काम
गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र का रहने वाला बनारसी यादव पूर्वांचल के कई आपराधिक नेटवर्क और माफियाओं के लिए सुपारी किलिंग कर चुका था। सूत्र बताते हैं कि वह सीधे किसी बड़े गिरोह का चेहरा नहीं था, बल्कि परदे के पीछे रहकर काम करने वाला शार्पशूटर था, जो पैसे के बदले बिना सवाल किए हत्या को अंजाम देता था। यही वजह रही कि उसका नाम तो फैलता गया, लेकिन उसकी व्यक्तिगत पहचान आम लोगों और यहां तक कि कई पुलिसकर्मियों के लिए भी धुंधली बनी रही।
सारनाथ हत्याकांड के बाद टूटा रहस्य का घेरा
महेंद्र गौतम हत्याकांड के बाद जांच जब गहराई से आगे बढ़ी, तो पुलिस को बनारसी यादव की गतिविधियों की ठोस कड़ियां मिलने लगीं। इसी के साथ उसके अदृश्य रहने का दौर खत्म होने लगा। पुलिस और एसटीएफ ने उसकी तलाश तेज की और आखिरकार वही वारदात उसके अपराधी जीवन के अंत की वजह बनी।
अपराध जगत के लिए एक संदेश
बनारसी यादव की कहानी इस बात की मिसाल है कि अपराध की दुनिया में लंबे समय तक छुपकर रहना संभव हो सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं। नाम भले ही डर पैदा करे और चेहरा सालों तक ओझल रहे, मगर कानून की नजर से कोई भी हमेशा बच नहीं सकता। ‘अदृश्य शूटर’ की पहचान आखिरकार सामने आई—और उसके साथ ही पूर्वांचल के अपराध जगत का एक रहस्यमयी अध्याय भी समाप्त हो गया।

