वाराणसी में सकुशल संपन्न हुई बकरीद की नमाज, अमन-चैन और भाईचारे का दिया पैगाम, पुलिस अधिकारियों ने चक्रमण कर देखे सुरक्षा इंतजाम 

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वाराणसी। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व शनिवार को जनपद में पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। सुबह से ही शहर की विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लोगों ने नमाज अदा कर देश में अमन, चैन, तरक्की और भाईचारे की दुआ मांगी। त्योहार के दौरान काशी की गंगा-जमुनी तहजीब एक बार फिर देखने को मिली, जहां हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द का संदेश लोगों ने पूरे देश को दिया।

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नमाज के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नमाजियों ने कहा कि काशी सदियों से गंगा-जमुनी संस्कृति की मिसाल रही है। यहां मंदिरों की आरती और मस्जिदों की अजान एक साथ सुनाई देती है, जो शहर की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने कहा कि यही संदेश पूरी दुनिया को आपसी प्रेम और भाईचारे का रास्ता दिखाता है।

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नमाजियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सभी वर्गों के हित में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की गाइडलाइन के अनुरूप ही ईद-उल-अजहा की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से अदा की गई। लोगों से अपील की गई कि कुर्बानी से संबंधित वीडियो या तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल न करें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

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उन्होंने “स्वच्छ काशी, सुंदर काशी” के संदेश को आगे बढ़ाते हुए कहा कि शहर की स्वच्छता बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। कुर्बानी के बाद अपशिष्ट निर्धारित स्थानों पर ही डालने की अपील भी की गई।

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अपर पुलिस आयुक्त शिवहरी मीणा ने बताया कि बकरीद को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पहले ही पीस कमेटी की बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा और सोशल मीडिया पर भी विशेष निगरानी रखी गई। सीसीटीवी कैमरों एवं ड्रोन के जरिए पूरे शहर में नजर रखी गई।

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मौलाना जियाउल रहमान ने कहा कि ईद-उल-अजहा त्याग, बलिदान और मानवता का पर्व है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कुर्बानी के साथ स्वच्छता और आपसी भाईचारे का भी पूरा ध्यान रखें, ताकि कहीं भी कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

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