तीन से सात दिन के अंदर ही काम करने लगती हैं आयुर्वेदिक दवाइयां, बीएचयू के शोध में आया सामने 

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वाराणसी। आयुर्वेद दवाइयों के बारे में यह कहा जाता है कि देर से काम करती हैं। इस भ्रांति को दूर करने को लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ आयुर्वेद चिकित्सा के नए आकड़ों पर शोध किया। 14 हजार लोगों पर आयुर्वेद दवा के प्रभाव का डेटा दर्ज किया। इसमें 60 फीसद रोगियों को हृदय संबंधी और 70 फीसद को सांस संबंधी बीमारी है। रिसर्च में आयुर्वेदिक दवाइयों के अच्छे परिणाम सामने आए। शोध करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार आयुर्वेदिक दवाइयां तीन से सात दिन के अंदर ही काम करने लगी हैं। 

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आयुर्वेद संकाय के असिस्टेंट प्रोफेसर वैद्य सुशील कुमार दुबे ने बताया कि लगभग 14 हजार रोगियों का डेटा दर्ज किया गया। इस शोध में सामने आया कि 30 से 39 वर्ष के रोगी ज्यादा आर्युवेदिक हेल्थकेयर में आए और उनमें भी महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। 70 फीसद से ज्यादा रोगियों को श्वास संबंधी रोग और 60 परसेंट से ज्यादा रोगियों को हृदय संबंधी और हार्मोन संबंधी रोग पाए गए। शोध में आया कि 7 दिन में लगभग 59 प्रतिशत लोग आयुर्वेद के दवाओं के सेवन से लाभान्वित हुए।

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बताया कि कालेज से भी मरीजों का डेटा लिया गया था। इसमें यह देखने को मिला कि आयुर्वेद दवाएं भी जल्दी असर करती हैं। वहीं आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज करवा रहे भानु प्रताप सिंह ने बताया कि हम बाबतपुर के रहने वाले हैं उन्होंने कहा कि हम को अल्सर हुआ था लगभग 2 वर्षों तक एलोपैथिक दवा किया परंतु कुछ दिनों तक ठीक रहता था उसके बाद पुनः हो जाता था। हमने लगभग 3 माह दवा किया और लगभग 85 फीसद तक स्वस्थ हो गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि आयुर्वेद का कोई भी दुष्परिणाम नहीं है। वही आयुर्वेद कालेज के सहायक प्रो0 अजय कुमार गुप्ता ने बताया की हमारे कालेज से भी मरीजों का डेटा दिया गया था जिसमे यह देखने को मिला की आयुर्वेद दवाएं भी जल्दी असर करती हैँ।

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