बारिश में सर्पदंश और डूबने की घटनाओं से बचाव को लेकर जागरुकता, डॉ. मनीष त्रिपाठी ने बताया जीवनरक्षक उपाय
वाराणसी। बरसात के मौसम में सर्पदंश और डूबने की घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए लोगों को समय रहते सही प्राथमिक उपचार और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सिगरा थाना परिसर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष त्रिपाठी ने मीडिया और उपस्थित लोगों को सर्पदंश तथा डूबने जैसी आपात स्थितियों में अपनाए जाने वाले जीवनरक्षक उपायों की जानकारी दी।
डॉ. मनीष त्रिपाठी ने कहा कि बारिश के दिनों में जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों के कारण सांपों के रिहायशी इलाकों में आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। वहीं नदी, तालाब और जलभराव वाले क्षेत्रों में डूबने का खतरा भी अधिक रहता है। ऐसे समय में घबराने के बजाय सही प्राथमिक उपचार और तत्काल अस्पताल पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने बताया कि सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) एक महत्वपूर्ण जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की सांस या हृदय की धड़कन रुक जाए। प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा सही समय पर सीपीआर देने से मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ सकती है। विशेष रूप से डूबने की घटनाओं में यह प्रक्रिया जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन इसके साथ जल्द से जल्द चिकित्सकीय सहायता मिलना भी जरूरी है।
सर्पदंश में न करें लापरवाही
डॉ. त्रिपाठी ने सर्पदंश की स्थिति में लोगों को सबसे पहले मरीज को शांत रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मरीज को अनावश्यक रूप से चलने-फिरने न दें, क्योंकि इससे शरीर में विष तेजी से फैल सकता है। जिस अंग पर सांप ने काटा हो, उसे यथासंभव स्थिर रखें और बिना समय गंवाए मरीज को नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक, टोना-टोटका या अन्य अंधविश्वासों के चक्कर में समय बर्बाद करना जानलेवा साबित हो सकता है। सही इलाज केवल अस्पताल में ही संभव है।
एंटी-स्नेक वेनम से होता है उपचार
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि विषैले सांप के काटने के मामलों में चिकित्सकीय निगरानी में एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) दिया जाता है। इसलिए जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचेगा, उपचार उतना ही प्रभावी होगा।
डॉ. मनीष त्रिपाठी ने लोगों से अपील की कि बरसात के मौसम में जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतें। किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय मरीज को सुरक्षित रखें, प्राथमिक उपचार दें और तत्काल चिकित्सा सहायता लें। उन्होंने कहा कि समय पर सही उपचार और जागरूकता से सर्पदंश और डूबने जैसी घटनाओं में कई बहुमूल्य जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

