नाव पर इफ्तार को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने बताया निंदनीय, इफ्तार को ‘पिकनिक’ बनाने पर नाराजगी, एसएम यासीन बोले- यह इस्लाम की परंपरा के खिलाफ

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वाराणसी। गंगा नदी में नाव पर रोज़ा इफ्तार किए जाने के वायरल वीडियो को लेकर अब धार्मिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव एस एम यासीन ने इस पूरे मामले को निंदनीय बताते हुए कहा है कि इस तरह का कृत्य इस्लाम की शिक्षाओं और परंपराओं के खिलाफ है।

इफ्तार को बताया शुद्ध धार्मिक प्रक्रिया
एसएम यासीन ने कहा कि इफ्तार इस्लाम में एक शुद्ध धार्मिक कार्य है और इसे किसी तरह की सैर-सपाटा या पिकनिक के रूप में नहीं लिया जा सकता। उनका कहना है कि रोज़ा खोलने के तुरंत बाद मग़रिब की नमाज़ अदा करना आवश्यक होता है, ऐसे में नाव पर इस तरह का आयोजन धार्मिक अनुशासन के अनुरूप नहीं है।

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युवाओं की परवरिश पर उठाए सवाल
उन्होंने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह का कृत्य करने वाले युवकों की परवरिश पर सवाल खड़े होते हैं। उनके मुताबिक, इस प्रकार की गतिविधियां न केवल गलत संदेश देती हैं बल्कि समाज और मजहब की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

धार्मिक विद्वानों से प्रतिक्रिया की अपील
एसएम यासीन ने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे पर इस्लामिक विद्वान और आलिम भी सामने आकर अपनी राय रखें, ताकि समाज में सही संदेश पहुंचे और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

राजनीतिक और सामाजिक पहलू पर भी टिप्पणी
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं कुछ लोगों को राजनीतिक और सामाजिक तौर पर मुद्दा बनाने का अवसर देती हैं। उनके अनुसार, ऐसे कृत्य अनजाने में ही सही, लेकिन समुदाय के खिलाफ माहौल बनाने का कारण बन सकते हैं।

मामले को बताया दुखद
अंत में उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि इसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। उन्होंने समाज से अपील की कि धार्मिक कार्यों को उसकी मर्यादा और नियमों के अनुसार ही किया जाए, ताकि किसी की भावनाएं आहत न हों।

देखें वीडियो 

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