मणिकर्णिका घाट पर प्राचीन मूर्तियों के क्षतिग्रस्त होने का आरोप, स्थानीय लोगों ने जताया विरोध, प्रतिमाएं दोबारा स्थापित करने की उठाई मांग
वाराणसी। काशी के विश्व प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद लोगों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। वायरल वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि घाट पर चल रहे प्रोजेक्ट कार्य के दौरान यहां स्थापित प्राचीन मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। लोगों ने प्रतिमाओं को दोबारा स्थापित करने की मांग की।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर प्राचीन धरोहरों को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। लोगों ने आरोप लगाया कि कार्य के दौरान लापरवाही बरती गई, जिसके कारण ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की मूर्तियां टूट गईं। उनका कहना है कि मणिकर्णिका घाट न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां की प्राचीन संरचनाएं काशी की सांस्कृतिक विरासत की पहचान भी हैं।

कहा कि यहां अहिल्याबाई होलकर द्वारा सिवलिंग स्थापित किया गया था। विकास कार्य के दौरान उसे भी हटा दिया गया। स्थानीय लोगों ने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन उन्हें इस तरह से किया जाना चाहिए कि ऐतिहासिक धरोहरों को कोई क्षति न पहुंचे। लोगों ने मांग की कि जिन मूर्तियों के क्षतिग्रस्त होने का दावा किया जा रहा है, उन्हें शीघ्र पुनः स्थापित किया जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पाल समाज के लोगों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की कि क्षतिग्रस्त मूर्तियों का पुनर्स्थापन कराया जाए। पाल समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि मणिकर्णिका घाट की धार्मिक और ऐतिहासिक गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

