नेपाली युवक को नशीला पदार्थ खिलाकर मोबाइल और बैग लेकर फरार हो गया ऑटो चालक, समाजसेवी की मदद से परिवार से हुई मुलाकात 

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वाराणसी। नेपाल के काठमांडू निवासी निरंजन पांडेय अपने जीवन की नई शुरुआत करने जा रहे थे। उनका चयन जापान की एक बड़ी एयरपोर्ट निर्माण कंपनी में हुआ था और 14 मई को उनका इंटरव्यू निर्धारित था। परिवार खुश था और निरंजन भी अपने सुनहरे भविष्य को लेकर उत्साहित थे। लेकिन जापान रवाना होने से पहले आध्यात्मिक आस्था ने उन्हें काशी और मिर्जापुर के शक्तेशगढ़ स्थित स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के आश्रम तक पहुंचा दिया। यहीं से उनकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उनके सपनों को झकझोर कर रख दिया।

यथार्थ गीता से प्रभावित निरंजन पहले वाराणसी पहुंचे और फिर परमहंस आश्रम जाकर स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के दर्शन किए। दर्शन के बाद वह वापस वाराणसी लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक ऑटो चालक ने कथित तौर पर उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर उनका बैग और मोबाइल लूट लिया। इसके बाद निरंजन दारानगर इलाके में अचेत अवस्था में पाए गए। जब उन्हें होश आया तो उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ चुकी थी और वह ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे।

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मानसिक तनाव और सदमे की हालत में निरंजन घंटों महामृत्युंजय मंदिर के पास गुमसुम बैठे रहे। राहगीर उन्हें देखते रहे, लेकिन किसी ने मदद की कोशिश नहीं की। इसी दौरान असहाय लोगों की मदद करने वाले समाजसेवी अमन कबीर की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने निरंजन को अपने साथ ले जाकर उनकी देखभाल शुरू की। बाद में उन्हें जैतपुरा थाने ले जाया गया, जहां उन्होंने टूटी-बिखरी हालत में अपने परिवार की जानकारी दी।

पुलिस ने बेंगलुरु में रहने वाले उनके बड़े भाई चित्र पांडेय से ईमेल के जरिए संपर्क किया। सूचना मिलते ही चित्र पांडेय वाराणसी पहुंचे। इस बीच अमन कबीर ने निरंजन को सारनाथ स्थित काशी कुष्ठ सेवा संघ में रखा और लगातार उनकी सेवा करते रहे। जब दोनों भाई मिले तो भावुक होकर एक-दूसरे से लिपटकर रो पड़े।

चित्र पांडेय ने बताया कि उनके पिता मोहनराज पांडेय काठमांडू में शिक्षक रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना परिवार के लिए बड़ा सदमा है, क्योंकि निरंजन अपने करियर की सबसे अहम शुरुआत करने वाले थे। हालांकि उन्हें इस बात की राहत है कि काशी में इंसानियत का सहारा मिल गया।

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