नौतपा की तपिश के बीच बाबा विश्वनाथ का फलों के रस से विशेष अभिषेक, श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि के साथ भीषण गर्मी से राहत की कामना की
वाराणसी। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही सोमवार से नौ दिनों तक चलने वाले नौतपा की शुरुआत हो गई। भीषण गर्मी और तेज धूप के इस दौर में धर्मनगरी काशी में आस्था और भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिला। श्री काशी विश्वनाथ धाम में भगवान श्री विश्वेश्वर का विशेष पूजन-अर्चन करते हुए विभिन्न फलों के रस और गुलाब जल से अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ से जनकल्याण, सुख-समृद्धि और भीषण गर्मी से राहत की कामना की।
नौतपा के प्रथम दिन मंदिर में सुबह मंगला आरती के बाद विशेष अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच बाबा विश्वनाथ का अभिषेक गुलाब जल, लीची और आम के रस से किया गया। गर्भगृह में उपस्थित अर्चकों ने बताया कि नौतपा के पूरे नौ दिनों तक प्रतिदिन अलग-अलग शीतल पदार्थों और फलों के रस से भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा।

मंदिर प्रशासन के अनुसार आगामी दिनों में तरबूज, खरबूजा, गन्ने के रस, चंदन, सुगंधित पुष्प और अन्य प्राकृतिक शीतल सामग्रियों से बाबा का विशेष श्रृंगार और अभिषेक किया जाएगा। मान्यता है कि नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें अत्यंत प्रखर होती हैं और धरती पर गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है। ऐसे समय भगवान शिव को शीतल पदार्थ अर्पित करने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भक्तों को मानसिक शांति प्राप्त होती है।
नौतपा के पहले दिन मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की। मंदिर परिसर “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजता रहा। कई श्रद्धालुओं ने विशेष रुद्राभिषेक और पूजन भी कराया।

ज्योतिषाचार्यों और विद्वानों के अनुसार नौतपा का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में सूर्य की तपिश अधिक रहने से मौसम में तेजी से बदलाव आता है। धार्मिक दृष्टि से इसे तप, संयम, दान और भगवान की उपासना के लिए अत्यंत शुभ समय माना गया है। काशी के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी नौतपा को लेकर विशेष अनुष्ठानों की शुरुआत हो चुकी है। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को तेज धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने और सात्विक भोजन ग्रहण करने की सलाह दी है।

