कम वर्षा की आशंका के बीच सरकार की नई रणनीति, किसानों को वैकल्पिक फसलों और प्राकृतिक खेती पर जोर, कृषि मंत्री ने दिए निर्देश 

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वाराणसी। खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने मौसम की संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि क्षेत्र में नई रणनीति लागू करने का फैसला किया है। वाराणसी स्थित सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इस वर्ष श्रीअन्न (मिलेट्स) और तिलहन फसलों के रकबे में वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसानों को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें और उत्पादन पर मौसम के प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके।

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कृषि मंत्री ने बताया कि मौसम वैज्ञानिकों द्वारा एल नीनो प्रभाव और सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई गई है। इसे देखते हुए प्रदेश के लगभग दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को धान की पारंपरिक खेती के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही करीब तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। इस तकनीक से कम पानी में खेती संभव होने के साथ-साथ उत्पादन लागत में भी कमी आती है और किसानों को बेहतर लाभ प्राप्त होता है।

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए भी लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में 40 हजार क्विंटल मूंगफली बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसकी ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो चुकी है। इसके अलावा कम वर्षा की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए धान की उपयुक्त किस्मों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है।

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उर्वरकों की उपलब्धता पर जानकारी देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में 14.84 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 5.11 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4.81 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 4.02 लाख मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट तथा 1.03 लाख मीट्रिक टन पोटाश का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 25 से 30 प्रतिशत तक कम करने और प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे खेती की लागत घटेगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।
 


उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग 18 और 19 जून को विशेष कार्यशाला आयोजित करेगा। इस दौरान किसानों को आधुनिक और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर 12 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें बधाई भी दी।

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