सोशल मीडिया पर लगाया अफसरों पर आरोप, जांच में नहीं दे सके कोई सबूत, चली गई यूपी पुलिस के सिपाही की नौकरी
वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप साबित नहीं कर सके आरक्षी, विभागीय जांच के बाद पुलिस सेवा से बर्खास्त
लखनऊ। सोशल मीडिया पर अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ लगातार आरोप लगाना उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही को भारी पड़ गया। आरोपों की जांच कराई गई, लेकिन आरक्षी अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। विभागीय जांच में उन्हें अनुशासनहीनता और सेवा नियमों के उल्लंघन का दोषी पाए जाने के बाद पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला को सेवा से बर्खास्त कर दिया।
जांच समिति के सामने नहीं रख सके कोई साक्ष्य
पुलिस कमिश्नरेट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। मामले की विभागीय जांच कराई गई, जिसमें उन्हें अपना पक्ष रखने और आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया। हालांकि वह अपने किसी भी आरोप को प्रमाणित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दे सके।
सोशल मीडिया के अनधिकृत इस्तेमाल का भी आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि आरक्षी ने सोशल मीडिया का अनधिकृत रूप से इस्तेमाल करते हुए विभाग की छवि धूमिल करने का प्रयास किया। विभाग का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर बिना प्रमाण गंभीर आरोप लगाना पुलिस बल की साख और अनुशासन दोनों के खिलाफ है।
अमर्यादित भाषा और सेवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि
विभागीय जांच में वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति अमर्यादित भाषा के प्रयोग और अनुशासनहीनता को बढ़ावा देने की भी पुष्टि हुई। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया नीति-2023 तथा सरकारी सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का मामला भी सही पाया गया।
गंभीर दुराचार मानते हुए हुई कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कमिश्नरेट ने पूरे मामले को गंभीर दुराचार माना। इसके बाद आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला को पुलिस सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सेवा नियमों और अनुशासन का उल्लंघन करने वाले किसी भी कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

