Akanksha Dube Case : अदालत ने सारनाथ थाने से तलब की रिपोर्ट, अनुराधा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने की अपील

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वाराणसी। भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में मंगलवार को सिविल जज एफटीसी प्रथम शक्ति सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। आकांक्षा की मां मधु दुबे के अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कोर्ट में तीन विंदुओं पर बहस की। अदालत ने अधिवक्ता के प्रार्थना पत्र के आलोक में सारनाथ थाने से रिपोर्ट तलब कर ली है।

गौरतलब है कि 25 मार्च की रात भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की सारनाथ के एक होटल के कमरे में संदिग्ध हालात में फांसी पर लटकती हुई लाश मिली थी। आकांक्षा भोजपुरी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में बनारस आई थी। दूसरे दिन सुबह से ही शूटिंग होनी थी इससे पहले वह चल बसी। इस मामले में आकांक्षा की मां मधु दुबे ने आजमगढ़ निवासी गायक समर सिंह और उसके भाई संजय सिंह पर हत्या का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन पुलिस ने आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में पुलिस ने गाजियाबाद से घटना के 12 दिन बाद गायक समर सिंह को गिरफ्तार किया था। बाद में उसके भाई संजय सिंह की नाटकीय ढंग से वाराणसी के रिंग रोड के पास से गिरफ्तारी बताई गई। पुलिस ने समर का पांच दिन का रिमांड लिया था। इस दौरान तमाम सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिशें हुई। समर और आकांक्षा से जुड़े दस बैंक एकाउंट खगाले गये।

सोमवार की शाम पांच बजे उसे जेल भेज दिया गया। लेकिन इसी दौरान मां के आरोप और अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी के प्रार्थना पत्र पर मुम्बई की फिल्म कलाकार अनुराधा सिंह को नोटिस भेजकर विवेचक ने तलब कर लिया। लेकिन नोटिस भेजने के 48 घंटे के बाद भी अनुराधा नही आई। मंगलवार को अदालत में सुनवाई के दौरान विवेचक शशांक शेखर ने अनुराधा को नोटिस भेजने पर बहस की। कहाकि यदि वह नही आती तो उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाय। बता दें कि इस अनुराधा पर आरोप है कि उसने आकांक्षा का शव जलवाने में हड़बड़ी मचाई। इसके साथ अंतिम संस्कार के दौरान उसने आकांक्षा की मां और भाई के मोबाइल को अपने कब्जे में ले लिया था। उस पर कोई फोन करता तो उसके साथ दुर्व्यवहार करती रही। गालियां देने का भी आरोप है। यही नही उसने मां और भाई के मोबाइल के काल डिटेट के अलावा सारा डाटा उड़ा दिया था। इसलिए अनुराधा की भूमिका पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं।

उधर, कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता शशांक शेखर ने तीन विंदुओं पर बहस की। बताया कि विवेचक को केस डायरी के साथ अदालत तलब करे। दूसरा विवेचना के दौरान पुलिस कमिश्नर द्वारा प्रेस नोट जारी करने के मामले में रिपोर्ट मंगाई जाय नही तो खुद पुलिस कमिश्नर कोर्ट में हाजिर होकर स्पष्टीकरण दें। तीसरा सवाल यह कि वादिन मधु दुबे का धारा 164 के तहत कोर्ट में बयान लिया जाय और उसे विवेचक को भेजा जाय। ताकि वादिनी के बयान के आधार पर विवेचना हो सके। इन तीनों सवालों पर अदालत ने रिपोर्ट तलब कर ली है।        

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