NEET (UG) Re-Exam के बाद अभ्यर्थियों की छलकी पीड़ा, बोले- पेपर लीक ने बिगाड़ा भविष्य का गणित

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वाराणसी। नीट परीक्षा पेपर लीक प्रकरण के बाद आयोजित री-एग्जाम भले ही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया हो, लेकिन परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलने वाले कई अभ्यर्थियों के चेहरे पर मायूसी साफ दिखाई दी। छात्रों का कहना है कि दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय आवश्यक था, लेकिन पेपर लीक की घटना ने उनकी मानसिक तैयारी और आत्मविश्वास को प्रभावित किया है।

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परीक्षा देकर बाहर आए कई अभ्यर्थियों ने बताया कि पहली बार आयोजित हुई परीक्षा में उनका प्रदर्शन बेहतर रहा था। उनका मानना है कि यदि पेपर लीक की घटना सामने नहीं आती तो वे अधिक अच्छे परिणाम की उम्मीद कर सकते थे। वहीं री-एग्जाम में प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत कठिन लगने और मानसिक दबाव के कारण वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाए।

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कुछ छात्रों का कहना था कि पहले हुए पेपर के लीक होने की वजह से कटऑफ अधिक जाने की संभावना थी, जबकि दोबारा हुई परीक्षा के बाद कटऑफ कम रहने की उम्मीद है। हालांकि उनका मानना है कि यह बदलाव उन छात्रों की मानसिक परेशानी और अतिरिक्त दबाव की भरपाई नहीं कर सकता, जिन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ी।

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अभ्यर्थियों ने बताया कि री-एग्जाम से पहले उन्हें तैयारी के लिए अतिरिक्त समय तो मिला, लेकिन पेपर लीक विवाद और अनिश्चितता के माहौल ने उनकी पढ़ाई को प्रभावित किया। उनका कहना है कि जब कोई छात्र मानसिक रूप से परेशान हो जाता है तो वह अपनी पूरी क्षमता के साथ परीक्षा नहीं दे पाता।

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छात्रों ने सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं और इनमें किसी भी प्रकार की अनियमितता छात्रों की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर सकती है।

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री-एग्जाम के बाद भले ही प्रक्रिया पूरी हो गई हो, लेकिन पेपर लीक की घटना ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का मानना है कि निष्पक्ष, सुरक्षित और समयबद्ध परीक्षाएं ही देश के युवाओं को उनके सपनों तक पहुंचाने का सबसे मजबूत माध्यम बन सकती हैं।

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