23 साल बाद सावन सोमवार और नागपंचमी का अद्भुत संयोग, शिव भक्ति में डूबी कशी 

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स्पेशल रिपोर्ट - ओमकार नाथ

वाराणसी। देवाधिदेव भगवान शिव को अतिप्रिय पवित्र सावन मास का शुभारंभ गुरुवार से हो गया। सावन के आगमन के साथ ही धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में अगले एक महीने तक उत्सव जैसा माहौल रहेगा। मंदिरों में रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और पूजन-अर्चन का क्रम तेज होगा तो गंगा घाटों से लेकर शिवालयों तक हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष सुनाई देंगे। सावन मास में पड़ने वाले व्रत और त्योहारों में भगवान शिव की विशेष आराधना की जाएगी।

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इस बार सावन में चार सोमवार, मंगला गौरी के पांच व्रत, नागपंचमी, हरियाली तीज, रक्षाबंधन समेत कुल 15 प्रमुख व्रत एवं त्योहार पड़ेंगे। सबसे खास बात यह है कि 23 वर्ष बाद सावन का सोमवार और नागपंचमी एक ही दिन पड़ने का संयोग बना है। यह विशेष संयोग 17 अगस्त को होगा। सावन का पहला सोमवार तीन अगस्त को पड़ेगा।

भगवान विष्णु के प्रिय दिन शुरू, देवी के प्रिय दिन होगा समापन
हिंदू पंचांग और सनातन परंपरा में सावन मास का विशेष महत्व माना गया है। इस बार सावन की शुरुआत भगवान श्रीहरि विष्णु को प्रिय बृहस्पतिवार से हुई है, जबकि इसका समापन देवी के प्रिय शुक्रवार को होगा। सावन में भगवान शिव की आराधना का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस महीने में श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजन करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित संस्कृत विद्याधर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर विनय कुमार पांडेय के अनुसार सावन में होने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार भगवान शिव को समर्पित होते हैं। इस मास में भगवान शिव प्रधान देवता के रूप में पूजे जाते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार और मंगला गौरी व्रत के साथ अन्य पर्वों पर भी शिव आराधना का विशेष महत्व है।

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तीन अगस्त को पहला सोमवार, 17 को नागपंचमी का संयोग
सावन का पहला सोमवार तीन अगस्त को होगा। इसके बाद 10 अगस्त को दूसरा सोमवार, 17 अगस्त को तीसरा सोमवार और 24 अगस्त को चौथा सोमवार पड़ेगा। तीसरे सोमवार यानी 17 अगस्त को ही नागपंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। इस तरह 23 साल बाद सावन सोमवार और नागपंचमी के एक साथ पड़ने से इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाएगा।

सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन करने के लिए शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। काशी के प्रमुख शिव मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन और अनुष्ठानों का दौर चलेगा।

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मंगला गौरी के पांच व्रत
सावन में सोमवार के साथ ही महिलाओं के लिए मंगला गौरी व्रत का भी विशेष महत्व है। इस बार 31 जुलाई, 4 अगस्त, 11 अगस्त, 18 अगस्त और 25 अगस्त को मंगला गौरी व्रत पड़ेंगे। महिलाएं अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए मंगला गौरी का व्रत रखकर विधि-विधान से पूजन करेंगी।

कांवड़ से लेकर पंचक्रोशी तक निकलेगी शिवभक्तों की यात्रा
सावन में भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी आराधना के लिए काशी में विभिन्न धार्मिक यात्राओं का भी आयोजन होगा। शिवभक्त कांवड़ यात्रा, पंचक्रोशी परिक्रमा यात्रा, द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा, वृहद त्रिशूल यात्रा, एकादश महारुद्र शिवलिंग दर्शन यात्रा, बैजनाथ धाम यात्रा और श्री केदारेश्वर अंतर्गृही दर्शन यात्रा सहित विभिन्न यात्राओं में शामिल होंगे।

इसके अलावा देवी यात्रा भी निकाली जाएगी। इन धार्मिक यात्राओं के माध्यम से श्रद्धालु काशी के विभिन्न शिवालयों और देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन कर भगवान शिव और माता शक्ति का आशीर्वाद लेंगे।

मठ-मंदिरों और आश्रमों में कथा-प्रवचन की धूम
सावन के दौरान काशी के मठों, आश्रमों, मंदिरों और विभिन्न धार्मिक प्रतिष्ठानों में धार्मिक आयोजनों की भी धूम रहेगी। यहां श्रीमद्भागवत कथा, विष्णुपुराण, शिवपुराण और श्रीरामचरितमानस की कथा के साथ भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।

गंगा घाटों पर भी सावन का विशेष रंग देखने को मिलेगा। कांवड़ियों और शिवभक्तों की आवाजाही बढ़ने के साथ घाटों पर सुबह से ही स्नान और पूजा-पाठ का क्रम शुरू होगा। गंगाजल लेकर भक्त बाबा विश्वनाथ समेत विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे।


बाबा विश्वनाथ की नगरी में हर दिन शिवमय माहौल
सावन के आगमन के साथ ही काशी में भगवान शिव की भक्ति का रंग और गहरा हो गया है। बाबा विश्वनाथ की नगरी में श्रद्धालुओं के लिए सावन के चारों सोमवार विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। वहीं 17 अगस्त को सोमवार और नागपंचमी का दुर्लभ संयोग होने के कारण इस दिन मंदिरों में विशेष भीड़ उमड़ने की संभावना है।

सावन के पूरे महीने काशी की गलियां, घाट और शिवालय हर-हर महादेव, बोल बम और जय भोलेनाथ के जयघोष से गूंजते रहेंगे। धर्म, आस्था और परंपरा के इस पावन महीने में काशी एक बार फिर पूरी तरह शिवमय नजर आएगी।

सावन के प्रमुख व्रत और त्योहार
 

सावन मास में कई महत्वपूर्ण पर्व और व्रत पड़ेंगे। प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं-

31 जुलाई — मंगला गौरी व्रत

3 अगस्त — सावन का पहला सोमवार

4 अगस्त — मंगला गौरी व्रत

8 अगस्त — कामिका एकादशी

10 अगस्त — सावन का दूसरा सोमवार

11 अगस्त — सावन की शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत

12 अगस्त — हरियाली अमावस्या

15 अगस्त — हरियाली तीज

17 अगस्त — सावन का तीसरा सोमवार और नागपंचमी का विशेष संयोग

18 अगस्त — मंगला गौरी व्रत

23 अगस्त — पुत्रदा एकादशी

24 अगस्त — सावन का चौथा सोमवार

25 अगस्त — मंगला गौरी व्रत

28 अगस्त — रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा

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