वाराणसी में 21 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड परियोजना का विरोध, कांग्रेस, सपाजनों के साथ प्रभावित लोगों ने सौंपा पत्रक, बोले- पहले डीपीआर सार्वजनिक करे प्रशासन
वाराणसी। प्रस्तावित 21 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर वाराणसी में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। परियोजना से प्रभावित होने की आशंका जता रहे स्थानीय लोगों और उनके प्रतिनिधियों ने मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) सार्वजनिक करने और प्रभावित क्षेत्रों में खुली जनसुनवाई कराने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे संजीव सिंह ने कहा कि किसी भी बड़ी विकास परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले उससे प्रभावित होने वाले लोगों को पूरी जानकारी देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड की जद में शहरी क्षेत्र के गरीब परिवारों, छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और वरुण नदी के किनारे रहने वाले लोगों के प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना के दायरे में कौन-कौन से क्षेत्र, मकान, दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान आएंगे।

पहले सार्वजनिक हो DPR
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि एलिवेटेड रोड की पूरी DPR सार्वजनिक की जाए। संजीव सिंह के मुताबिक, DPR सामने आने के बाद ही लोगों को परियोजना के वास्तविक स्वरूप, प्रस्तावित मार्ग और संभावित प्रभावों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि दस्तावेज सार्वजनिक होने से प्रभावित लोग अपनी आपत्तियां और सुझाव तथ्यों के आधार पर प्रशासन के सामने रख सकेंगे।
प्रभावित इलाकों में हो जनसभा
स्थानीय लोगों ने प्रभावित क्षेत्रों में खुली मुनादी कराकर जनसभाएं आयोजित कराने की भी मांग की। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि केवल कार्यालय स्तर पर प्रक्रिया पूरी करने के बजाय प्रशासन को सीधे लोगों के बीच पहुंचना चाहिए। जनसभाओं में प्रभावित परिवारों, व्यापारियों और स्थानीय निवासियों की समस्याएं सुनी जाएं और उनके सुझावों को परियोजना की योजना में शामिल किया जाए।
विकास के साथ जनहित का भी ध्यान
संजीव सिंह ने कहा कि वे विकास परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया पारदर्शी और जनहितकारी होनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि लोगों को पूरी जानकारी दिए बिना परियोजना आगे बढ़ाई गई तो कई परिवारों के सामने आवास और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने बशीर बद्र के प्रसिद्ध शेर, “लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में…” का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास के नाम पर लोगों के आशियाने और आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि DPR सार्वजनिक होने, प्रभावित क्षेत्रों में जनसुनवाई कराने और लोगों की आपत्तियों व सुझावों पर गंभीरता से विचार किए जाने तक परियोजना को लेकर उनका विरोध जारी रहेगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की कि विकास और जनहित के बीच संतुलन कायम करते हुए आगे की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए।

