वाराणसी में अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची की जांच की उठाई मांग
वाराणसी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वाराणसी में वकीलों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई। अधिवक्ताओं के हाथों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों वाले पोस्टर भी दिखाई दिए।
वकीलों ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान देशभर की मतदाता सूचियों से करीब 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। इस मुद्दे को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों और संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।

निष्पक्ष चुनाव को लेकर उठाए सवाल
प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पारदर्शी और स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद पर रहते हुए चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर स्पष्टीकरण की मांग की और उनके इस्तीफे की मांग रखी।
अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि मतदाता सूची से हटाए गए लोग पात्र मतदाता थे तो उनके नाम हटाने का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं यदि किसी व्यक्ति का नाम नियमों के तहत हटाया गया है तो इसकी प्रक्रिया और कारणों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
न्यायिक जांच की मांग
वकीलों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से ही आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकेगी और जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर हो चुकी है, जिसमें करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच के लिए SIT की मांग की गई है।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के समर्थन की बात कही। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कथित अनियमितताओं की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को आगे भी जारी रखने की चेतावनी दी गई।

