वाराणसी में प्राकृतिक खेती को मिलेगा नया आधार, गो-आधारित कृषि के लिए एक वर्षीय पायलट परियोजना शुरू, MOU साइन
वाराणसी। जनपद में प्राकृतिक, टिकाऊ एवं गो-आधारित कृषि को वैज्ञानिक आधार पर बढ़ावा देने की दिशा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण पहल की गई। बंशी गिर गौशाला, अहमदाबाद (गुजरात), कृषि विभाग वाराणसी और उद्यान विभाग वाराणसी के बीच एक वर्ष की अवधि के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा पर्यावरण के अनुकूल कृषि प्रणाली विकसित करना है।
समझौता ज्ञापन पर उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल, जिला उद्यान अधिकारी सुभाष कुमार तथा बंशी गिर गौशाला के संस्थापक गोपालभाई सुतारिया ने हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी सतेन्द्र कुमार और मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
एमओयू के तहत वाराणसी जनपद में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में चयनित प्रगतिशील किसानों के साथ एक वर्ष की पायलट परियोजना संचालित की जाएगी। इस परियोजना में "गो कृपा अमृतम्" आधारित प्राकृतिक एवं गो-आधारित कृषि पद्धति का वैज्ञानिक परीक्षण, प्रदर्शन और मूल्यांकन किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य यह आकलन करना है कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से मृदा की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और किसानों की आय में किस प्रकार सुधार लाया जा सकता है।
परियोजना के अंतर्गत चयनित किसानों को नियमित तकनीकी प्रशिक्षण, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, साप्ताहिक फील्ड मॉनिटरिंग तथा वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कृषि विभाग, उद्यान विभाग और बंशी गिर गौशाला के विशेषज्ञ संयुक्त रूप से खेतों का निरीक्षण करेंगे तथा परियोजना के प्रत्येक चरण का वैज्ञानिक अभिलेखीकरण किया जाएगा।
परियोजना में किसानों का चयन पूरी तरह स्वैच्छिक आधार पर होगा। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य, सूक्ष्मजीवी गतिविधियों, कार्बन संचयन, पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और खेती की लाभप्रदता जैसे विषयों पर वैज्ञानिक अध्ययन भी किया जाएगा, जिससे प्राकृतिक खेती के प्रभावों का प्रमाण आधारित मूल्यांकन संभव हो सके।
किसानों का विश्वास बढ़ाने के लिए बंशी गिर गौशाला ने प्रारंभिक चरण में चयनित 100 किसानों के लिए प्रति किसान अधिकतम एक एकड़ क्षेत्र तक जोखिम सहायता (रिस्क सपोर्ट मैकेनिज्म) उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है। यदि परियोजना अपनाने के कारण निर्धारित आधार स्तर की तुलना में किसी किसान की लाभप्रदता कम होती है और उसका सत्यापन हो जाता है, तो उसकी भरपाई बंशी गिर गौशाला द्वारा की जाएगी। इस व्यवस्था से कृषि एवं उद्यान विभाग पर कोई वित्तीय दायित्व नहीं आएगा।
समझौते में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित करने, शोध पत्र एवं तकनीकी प्रकाशन तैयार करने तथा परियोजना के प्रभावी संचालन के लिए स्टीयरिंग, मॉनिटरिंग और कार्यान्वयन समितियों के गठन का भी प्रावधान किया गया है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि यह पहल वाराणसी में प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

