डोमरी में खड़ा हुआ ‘ग्रीन काशी’ का नया मॉडल, ढाई महीने में मियावाकी वन में बढ़ने लगी हरियाली
वाराणसी। नगर निगम की ओर से डोमरी (सूजाबाद) में विकसित किया गया मियावाकी वन अब केवल एक पौधरोपण परियोजना नहीं, बल्कि ‘ग्रीन काशी’ की जीवंत तस्वीर बनकर सामने आने लगा है। ठीक ढाई महीने पहले 1 मार्च को जहां एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया था, वहीं अब उसी स्थल पर तीन से पांच फीट ऊंचे घने पौधों ने एक विकसित जंगल का रूप ले लिया है।

सोमवार को इस हरित परियोजना की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के लिए महापौर अशोक कुमार तिवारी के नेतृत्व में 110 पार्षदों का दल डोमरी पहुंचा। इस दौरान पार्षदों ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और पौधों की बढ़वार, सुरक्षा व्यवस्था तथा रखरखाव का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान स्थल पर पूरी तरह बदला हुआ नजारा देखने को मिला, जहां पहले बंजर जमीन थी, वहां अब हरियाली की एक मजबूत दीवार खड़ी हो चुकी है।

करीब 350 बीघे में फैले इस मियावाकी वन में लगाए गए पौधे तेजी से विकसित हो रहे हैं। पौधों पर न केवल घनी पत्तियां आ चुकी हैं, बल्कि कई जगहों पर कलियां और छोटे फूल भी दिखाई देने लगे हैं। कुछ ही महीनों में पौधों की ऊंचाई तीन से पांच फीट तक पहुंच गई है, जिससे पूरा क्षेत्र एक सघन हरित आवरण में बदल गया है।

पर्यावरणीय बदलाव का असर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले जहां पूरी तरह सन्नाटा रहता था, वहां अब पक्षियों की चहचहाहट और प्राकृतिक ध्वनियों ने वातावरण को जीवंत बना दिया है। स्प्रिंकलर सिस्टम से होने वाली सिंचाई के कारण पौधों को लगातार नमी मिल रही है, जिससे उनकी वृद्धि तेज गति से हो रही है।
नगर निगम ने इस परियोजना को सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए हाईटेक व्यवस्था की है। पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है, जबकि रात के समय हाईमास्क लाइटों से पूरा परिसर रोशन रहता है। सुरक्षा के लिए गार्डों की तैनाती भी की गई है, जो 24 घंटे निगरानी में लगे रहते हैं।
महापौर ने निरीक्षण के दौरान कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह बंजर भूमि अब भविष्य में काशी की हरित पहचान बनेगी और आने वाले वर्षों में एक मजबूत ‘ग्रीन बेल्ट’ के रूप में विकसित होगी।
इस मियावाकी वन में शीशम, सागौन, अर्जुन सहित 27 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा औषधीय पौधों जैसे अश्वगंधा और गिलोय को भी शामिल किया गया है, जिससे यह क्षेत्र न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा बल्कि औषधीय संसाधनों का भी केंद्र बनेगा।
नगर निगम के अनुसार, यह परियोजना आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी साबित होगी। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत तीसरे वर्ष से नगर निगम को करीब 2 करोड़ रुपये की वार्षिक आय होने लगेगी, जो आगे चलकर 7 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
पूरे क्षेत्र को मजबूत बाउंड्रीवॉल से सुरक्षित किया गया है। पौधों के सहारे के लिए करीब एक लाख बांस की स्टिक लगाई गई हैं, जबकि सिंचाई के लिए छह बोरिंग और 630 स्प्रिंकलर सिस्टम सक्रिय हैं। जल संरक्षण के लिए चार तालाबों का निर्माण प्रस्तावित है, जिनमें से दो पूरी तरह तैयार हो चुके हैं।
महापौर ने कहा कि अगले दो से तीन वर्षों में यह क्षेत्र गंगा किनारे एक अभेद्य हरित दीवार के रूप में विकसित होगा, जो काशी को पर्यावरणीय रूप से और मजबूत बनाएगा। निरीक्षण के दौरान उपसभापति नरसिंह दास, सुरेश चौरसिया, अमरदेव यादव, प्रमोद राय सहित कई पार्षद मौजूद रहे।

