जन्माष्टमी पर भक्तिमय हुई काशी, इस्कॉन मंदिर में दर्शन के लिए लगी एक किलोमीटर लंबी कतार
51 द्रव्यों से होगा श्रीकृष्ण का महाभिषेक, 108 व्यंजनों का लगेगा भोग, धर्मसंघ में 10 से अधिक झांकियां और 101 कुंतल हलवा बना आकर्षण
दुर्गाकुंड इस्कॉन मंदिर में सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भजन-कीर्तन से गूंजा परिसर, धर्मसंघ में मध्यरात्रि को मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
महाभिषेक के बाद 108 प्रकार के व्यंजनों का लगेगा विशेष भोग, धर्मसंघ में श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित 10 से अधिक झांकियां सजाईं गईं
मध्यरात्रि में होगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 56 प्रकार के व्यंजनों का लगेगा भोग, 101 कुंतल हलवा तैयार, भोग के बाद श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा प्रसाद
वाराणसी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को पूरी काशी भक्तिभाव में डूबी नजर आई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष सजावट, पूजन-अर्चन और धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान के दर्शन के लिए मंदिर के बाहर करीब एक किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। हाथों में पूजा की थाली और मुख पर राधे-कृष्ण के जयकारों के साथ भक्त अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए।

मंदिर परिसर भजन-कीर्तन से गूंजता रहा। कीर्तन मंडलियों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु झूमते और नृत्य करते नजर आए। इस्कॉन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के महाभिषेक के लिए 51 प्रकार के द्रव्यों से विशेष मिश्रण तैयार किया गया है। इसमें गंगाजल, दूध, दही और विभिन्न फल-फूलों के रस शामिल हैं। रात 10 बजे रजत कलशों में रखे इन द्रव्यों से महाभिषेक शुरू होगा, जो मध्यरात्रि तक चलेगा। इसके बाद लड्डू गोपाल को 108 प्रकार के व्यंजनों का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।

धर्मसंघ में झांकियां बनीं आकर्षण
दूसरी ओर, दुर्गाकुंड स्थित श्रीधर्मसंघ शिक्षा मंडल में भी जन्माष्टमी उत्सव धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यहां 5 सितंबर तक चलने वाले उत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और लीलाओं पर आधारित 10 से अधिक झांकियां सजाई गई हैं। परिसर को विद्युत झालरों, रंग-बिरंगे फूलों और पत्तियों से भव्य रूप दिया गया है।

रात 12 बजे पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज के सानिध्य में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान विशेष पूजन, आरती और धार्मिक अनुष्ठान होंगे। ठाकुरजी को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। वहीं, जन्माष्टमी के लिए 101 कुंतल हलवा तैयार किया गया है, जिसे भगवान को भोग लगाने के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।

जन्माष्टमी के चलते काशी के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बनी हुई है। मंदिरों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्म के साथ ही मंदिरों में आरती, जयघोष और भक्ति का उल्लास चरम पर पहुंचने की उम्मीद है।



