वाराणसी में तैयार होगा घड़ियालों का कुनबा, सारनाथ में बनेगा प्रजनन केंद्र
कछुआ प्रजनन व पुनर्वास केंद्र में बनेगा घड़ियाल प्रजनन केंद्र
दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण की पहल, वन विभाग का प्रस्ताव मंजूर
मगरमच्छों की दुर्लभ प्रजाति मानी जाती है घड़ियाल
सुरक्षित वातावरण में विकसित होगी घड़ियालों की नई पीढ़ी
सारनाथ के मिनी जू में मौजूद हैं तीन मादा घड़ियाल
वाराणसी। गंगा की स्वच्छता और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में वाराणसी में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। वन विभाग की ओर से सारनाथ स्थित कछुआ प्रजनन एवं पुनर्वास केंद्र में घड़ियाल प्रजनन केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस परियोजना के तहत बड़ी संख्या में घड़ियालों का संरक्षण और प्रजनन किया जाएगा, जिससे इस दुर्लभ प्रजाति की घटती संख्या को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रस्ताव को मिली मंजूरी
वाराणसी वृत्त के वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह ने बताया कि वाराणसी वन प्रभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव को भारत सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। अब परियोजना को धरातल पर उतारने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि लखनऊ के कुकरेल घड़ियाल प्रजनन केंद्र की तर्ज पर वाराणसी में भी आधुनिक सुविधाओं से युक्त केंद्र विकसित किया जाएगा, जहां घड़ियालों के संरक्षण और प्रजनन की व्यवस्था होगी।

भूमि चयन व बाड़ों के स्वरूप को अंतिम रूप देने में जुटा विभाग
वन विभाग के अनुसार परियोजना के तहत घड़ियालों के लिए विशेष बाड़े बनाए जाएंगे और उनके अनुकूल प्राकृतिक वातावरण तैयार किया जाएगा। फिलहाल भूमि चयन और बाड़ों के स्वरूप को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। योजना के अनुसार केंद्र में हजारों घड़ियालों की नई पीढ़ी को सुरक्षित वातावरण में विकसित किया जाएगा।

मगरमच्छ की दुर्लभ प्रजाति मानी जाती है घड़ियाल
विशेषज्ञों का मानना है कि घड़ियाल नदियों के पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह मगरमच्छ की एक दुर्लभ प्रजाति है, जो मुख्य रूप से गंगा और चंबल जैसी नदियों में पाई जाती है। घड़ियाल केवल मछलियों पर निर्भर रहते हैं और मनुष्यों या अन्य बड़े जानवरों के लिए सामान्यतः खतरा नहीं बनते। नदियों की जैविक स्वच्छता बनाए रखने में भी इनकी अहम भूमिका मानी जाती है।
सारनाथ के मिनी जू में मौजूद हैं तीन मादा घड़ियाल
वर्तमान में सारनाथ मिनी जू में तीन मादा घड़ियाल मौजूद हैं। इन्हीं के आधार पर प्रजनन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की योजना है। केंद्र में घड़ियालों के अंडों को सुरक्षित रखने और उनके वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी।
वन विभाग का मानना है कि यह परियोजना न केवल घड़ियालों के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि गंगा के पारिस्थितिक संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

