काशी-विंध्य रीजन के महाविकास का खाका तैयार, 32 प्रोजेक्ट बदलेंगे 7 जिलों की तस्वीर

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वाराणसी। काशी और विंध्य क्षेत्र के महाविकास का बड़ा खाका तैयार हो गया है। वाराणसी समेत पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र के सात जिलों को एक साथ जोड़कर देश के प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। नीति आयोग ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ‘काशी विंध्य रीजन इकोनॉमिक मास्टर प्लान’ तैयार किया है। इसके तहत कुल 32 प्राथमिक प्रोजेक्ट चिह्नित किए गए हैं, जो आने वाले वर्षों में इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और आधारभूत ढांचे में बड़े बदलाव की बुनियाद बन सकते हैं।

इस योजना के केंद्र में वाराणसी होगा। काशी को पूरे क्षेत्र के ‘रीजनल ग्रोथ पोल’ यानी प्रमुख आर्थिक, सांस्कृतिक और सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। काशी-विंध्य रीजन में वाराणसी के साथ चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही को शामिल किया गया है। इन सात जिलों की आबादी करीब 23 मिलियन यानी 2.30 करोड़ है, जो उत्तर प्रदेश की आबादी का करीब 9.6 प्रतिशत है। पूरे क्षेत्र का दायरा 23,800 वर्ग किलोमीटर है, जो प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का करीब 10 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2024 में इस क्षेत्र की जीडीपी 24 बिलियन डॉलर यानी करीब 24 अरब डॉलर आंकी गई है, जो उत्तर प्रदेश की जीडीपी का 7.7 प्रतिशत है।

2030 तक 44-45 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य
मास्टर प्लान का विजन काशी-विंध्य रीजन को अपनी सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यावरणीय विरासत को सुरक्षित रखते हुए 2030 तक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी आर्थिक केंद्र और भारत के अग्रणी आर्थिक इंजनों में शामिल करना है। वर्ष 2024 में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था 24 बिलियन डॉलर है। इसे 2030 तक 44 से 45 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का मध्यावधि लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 35 से 40 बिलियन डॉलर के निवेश और 15 से 19 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने की परिकल्पना की गई है। इसके साथ ही प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने पर भी जोर होगा।

दीर्घकाल में विजन इससे कहीं बड़ा है। वर्ष 2047 तक काशी-विंध्य रीजन की अर्थव्यवस्था को 600 बिलियन डॉलर यानी 600 अरब डॉलर तक ले जाने की परिकल्पना है। इसका उद्देश्य क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी आर्थिक केंद्र बनाने के साथ नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराना और सतत एवं आपदा-सहनीय क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना है। इसे विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप रखा गया है।

पांच सेक्टर बनेंगे काशी-विंध्य के विकास के इंजन
मास्टर प्लान में पांच प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर तय किए गए हैं। पहला शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास है, जिसके माध्यम से क्षेत्र में एक मजबूत क्षेत्रीय एजुकेशन और हेल्थकेयर इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। दूसरा पर्यटन है, जिसके जरिए काशी-विंध्य रीजन को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की योजना है।

तीसरा मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और पावर सेक्टर है। इसके तहत औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों का विस्तार प्रस्तावित है। चौथा हाउसिंग एवं प्लान्ड अर्बनाइजेशन है, जिसके तहत नई नियोजित सिटी और मिक्स्ड यूज टाउनशिप विकसित की जाएंगी। पांचवां कृषि एवं उससे जुड़े सेक्टर हैं, जिनमें वैल्यू एडेड कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और डेयरी को बढ़ावा दिया जाएगा।

इन पांच ग्रोथ ड्राइवर्स को गति देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, सस्टेनेबिलिटी और इन्क्लूसिविटी को तीन बुनियादी आधार बनाया गया है। परिवहन नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और डिजिटल कनेक्टिविटी का विकास होगा। नवीकरणीय ऊर्जा और क्लाइमेट रेजिलिएंस को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही रोजगार, महिलाओं की भागीदारी और क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों तक विकास की समान पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा।

32 प्रोजेक्ट के आधार पर तैयार हुआ महाविकास का रोडमैप
इस पूरी कवायद की सबसे महत्वपूर्ण बात 32 प्राथमिक परियोजनाओं की पहचान है। नीति आयोग ने अप्रैल 2026 में संशोधित ड्राफ्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके बाद संबंधित विभागों को बेसलाइन डेटा की समीक्षा, जरूरत के अनुसार बदलाव सुझाने, चिह्नित 32 प्राथमिक परियोजनाओं की समीक्षा करने और उनके लिए इम्प्लीमेंटेशन रोडमैप तैयार करने को कहा गया। संबंधित विभागों से रिपोर्ट पर टिप्पणियां और फीडबैक भी मांगा गया।

इन परियोजनाओं का दायरा केवल वाराणसी तक सीमित नहीं होगा। योजना के तहत सातों जिलों की अलग-अलग आर्थिक ताकत को जोड़ने का प्रयास किया गया है। उद्योग एवं एमएसएमई, कृषि एवं उससे जुड़ी गतिविधियां, धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन, मानव पूंजी एवं शिक्षा तथा शहरी एवं क्षेत्रीय सेवाओं को काशी-विंध्य की नई अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार के रूप में चिह्नित किया गया है।

पांच साल में 5 हजार करोड़ रुपये की सहायता का प्रस्ताव
काशी-विंध्य रीजन के इस महत्वाकांक्षी प्लान को जमीन पर उतारने के लिए अलग फंडिंग फ्रेमवर्क भी तैयार किया गया है। पांच वर्षों की अवधि में 5,000 करोड़ रुपये की सहायता की परिकल्पना की गई है। प्रस्तावित फंडिंग स्ट्रक्चर के अनुसार 70 प्रतिशत धनराशि मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक यानी MDB लोन और 30 प्रतिशत भारत सरकार की सहायता से जुटाने की योजना है।

इस परियोजना में विश्व बैंक की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (DEA) ने काशी-विंध्य रीजन परियोजना के लिए विश्व बैंक को ऑनबोर्ड किया है। अब चिह्नित सभी 32 प्राथमिक परियोजनाओं की प्रिलिमिनरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी PPR तैयार किए जाने की योजना है।

हर प्रोजेक्ट के लिए तय होगी नोडल एजेंसी
योजना को केवल मास्टर प्लान तक सीमित न रखते हुए उसके क्रियान्वयन की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी काम शुरू हो चुका है। 32 प्राथमिक इंटरवेंशन के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक प्रोजेक्ट और सब-प्रोजेक्ट के लिए नोडल एजेंसी तय करने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। प्रत्येक संबंधित विभाग से कम से कम विशेष सचिव स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त करने की बात कही गई है।

नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी विश्व बैंक की टीम के साथ समन्वय करते हुए संबंधित परियोजना की PPR तैयार कराने और उसे अंतिम रूप देने की होगी। ड्राफ्ट काशी-विंध्य रीजन इकोनॉमिक प्लान पर राज्य सरकार की सहमति नीति आयोग को भेजने का विषय भी चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में शामिल किया गया है।

काशी बनेगी विकास की धुरी, सात जिलों को मिलेगा फायदा
मास्टर प्लान में वाराणसी को पूरे काशी-विंध्य क्षेत्र की विकास धुरी माना गया है। इसकी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और सेवा क्षेत्र की ताकत के साथ भदोही के उद्योग, मिर्जापुर-सोनभद्र की औद्योगिक एवं ऊर्जा क्षमता, गाजीपुर-जौनपुर की कृषि संभावनाओं तथा चंदौली की रणनीतिक कनेक्टिविटी को एक व्यापक क्षेत्रीय आर्थिक मॉडल में जोड़ने की परिकल्पना है।

इस तरह काशी-विंध्य रीजन का प्रस्तावित महाविकास केवल नई सड़कें या भवन खड़े करने तक सीमित नहीं है। 32 प्राथमिक प्रोजेक्ट के जरिए पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स, बिजली, कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, आवास और नियोजित शहरीकरण को एक साथ आगे बढ़ाने की तैयारी है। लक्ष्य है कि 2.30 करोड़ आबादी वाला यह क्षेत्र 2030 तक देश के प्रमुख आर्थिक ग्रोथ सेंटर में जगह बनाए और 2047 तक विकसित भारत की अर्थव्यवस्था में एक बड़े आर्थिक इंजन की भूमिका निभाए।

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