डबल एनकाउंटर के बाद फोरेंसिक व बैलिस्टिक एक्सपर्ट्स ने किया Scene Reconstruction

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वाराणसी। बड़ागांव थाना क्षेत्र के भेलखा गांव के पास डबल एनकाउंटर घटना का गुरूवार को फोरेंसिक एक्सपर्ट एवं बैलिस्टिक एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में सीन रीक्रिएशन (Scene Reconstruction) कराया गया।

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पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने बताया कि सम्पूर्ण कार्यवाही की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई है। वहीं इस घटना की विवेचना क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ निरीक्षक को आवंटित किया गया है। उधर, दोनों अपराधियों के बारे में जानकारी और मौके से भागे तीसरे भाई लल्लन सिंह की तलाश में पटना पहुंची एसआईटी की टीम ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। यह साक्ष्य विवेचना में मददगार साबित होंगे।
गौरतलब है कि पिछले दिनों आपरेशन पाताललोक के तहत पुलिस टीम ने भेलखा गांव के पास बिहार के समस्तीपुर के रहनेवाले दो शातिर बदमाश और सगे भाई मनीष सिंह और रजनीश सिंह को मुठभेड़ में मार गिराया था।

तीसरा अपराधी लल्लन सिंह मौके से भाग निकला था। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पुलिस ने लल्लन की गिरफ्तारी पर एक लाख रूपये का इनाम घोषित कर दिया है। इन तीनों बदमाशों ने रोहनिया थाना क्षेत्र के जगतपुर में लक्सा थाने पर तैनात दरोगा अजय यादव को तीन गोली मारकर उनकी पिस्टल लूट ली थी। बिहार में कई संगीन वारदातों को अंजाम देने और जेल से भागे दोनों अपराधी वाराणसी में ही रह रहे थे। इसी दौरान उन्होंने दरोगा को गोली मारकर पिस्टल लूट की घटना को अंजाम दे दिया। अब लल्लन की गिरफ्तारी या पाताल लोक पहुंचाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स और आपरेशनल टीम को टास्क दिये गये हैं।

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क्या होता है क्राइम सीन रीक्रिएशन

क्राइम सीन रीक्रिएशन किसी अपराध या घटना की जांच में अहम प्रक्रिया होती है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य घटना के बारे में सही सूचना जुटानी होती है ताकि बेगुनाहों को न फंसाया जा सके और घटना की परत दर पर खुल सके। इसमें फरेंसिक साइंस लैबरेट्री के वैज्ञानिकों क्राइम सीन रीक्रिएट करके मामले का विश्लेषण करते हैं। इसमें क्या हुआ, कहां हुआ, कैसे हुआ, कब हुआ, किसने किया और क्यों किया। इन सिद्धांतों पर क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन पर काम होता है। इस प्रक्रिया में उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अपराध स्थल पर यह तय किया जाता है कि घटना कैसे हुई। इस प्रक्रिया में अपराध स्थल की वैज्ञानिक जांच की जाती है, घटनास्थल के साक्ष्यों की व्याख्या की जाती है, भौतिक साक्ष्य की लैब में जांच की जाती है। केस से जुड़ी सूचनाओं की चरणबद्ध स्टडी की जाती है और तर्कों के आधार पर एक थयोरी तैयार की जाती है।

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