योगी सरकार के 9 साल : वाराणसी आए 46,34,62,498 से अधिक पर्यटक, घाटों पर बढ़ी सुविधाएं, गलियों का हुआ सौंदर्यीकरण

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  • योगी सरकार ने 9 वर्ष  में काशी की धार्मिक एवं पर्यटन विकास को तेजी से दिया आकार
  • समग्र, सतत, सुव्यवस्थित विकास से निवेश और विश्व पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभर रही काशी
  • 3 हज़ार स्क्वायर फिट से 5 लाख  स्क्वायर फिट में विस्तारित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर सनातनियों को कर रहा आकर्षित 
  • घाटों पर बढ़ी सुविधाएं, गलियों का हुआ सौंदर्यीकरण
  • तथागत की तपोस्थली सारनाथ, कबीर प्राकट्य स्थल, रैदास मंदिर, जैन तीर्थंकर चंद्रप्रभु की जन्मस्थली चंद्रावती आदि धर्म स्थलों का हुआ विकास 
  • वाराणसी में 53071 करोड़ रुपये की शिलान्यास हुई योजनाएं, कई लोकार्पित, कई पर चल रहा तेजी से कार्य

वाराणसी। प्राचीन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध काशी, जिसे दुनिया "वाराणसी" और 'बनारस' के नाम से भी जानती है। अब यह शहर फिर से अपने पुराने वैभव की ओर लौट रहा है। काशी का समग्र, सतत और सुव्यवस्थित विकास का ख़ाका खींच कर योगी सरकार काशी को निवेश और विश्व पर्यटन के मानचित्र पर उभार रही है। काशी में विगत 9 वर्ष में 35,156 करोड़ से अधिक की लागत से मार्ग, सेतु, पेयजल, सीवरेज, एसटीपी, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यटन, नगर विकास एवं पुलिस कल्याण आदि से सम्बन्धित 486 मुख्य परियोजनाएं पूर्ण कराकर आमजन को लोकार्पित की गयी हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 17,915 करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न परियोजनाओं का कार्य गतिमान है। विकास की इस प्रक्रिया में एक बड़ा बजट धर्म, अध्यात्म-संस्कृति के पुनरुद्धार और उत्थान के लिए भी खर्च हुआ है। काशी की मूलभूत सुविधाओं के दुरुस्त होने और बेहतर कनेक्टिविटी होने से काशी में पिछले 9 वर्ष में 463462498 से अधिक पर्यटक आये। 

योगी सरकार ने 9 वर्ष  में काशी की धार्मिक एवं पर्यटन विकास के कामों को तेजी से आकार दिया  है। सनातन की आस्था के केंद्र श्री काशी विश्वनाथ धाम में भक्तों का रिकॉर्ड आमद, काशी तमिल संगमम, जी-20 देशों की बैठक और शंघाई सहयोग संगठन में भारत की ओर से वर्ष 2022 से 2023 के लिए सांस्कृतिक व पर्यटन राजधानी के रूप में काशी के विकास पर मोहर लगा दिया है। 

काशी के कायाकल्प के लिए 53071 करोड़ रुपये की  शिलान्यास योजनाओं में से कुछ लोकार्पित हो चुकी हैं तो कुछ पर तेजी से कार्य चल रहा है। जल, थल और नभ से काशी की बेहतर कनेक्टिविटी हुई है। हाईवे का निर्माण, रिंग और फ्लाईओवर के जाल के साथ सड़कों के चौड़ीकरण, व्यवस्थित पार्किंग ने यातायात को सुगम बनाया है। जल परिवहन पर भी तेजी से कार्य हुआ है। एयरपोर्ट के विस्तार का कार्य चल रहा है। 

लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से 3 हज़ार स्क्वायर फिट से 5 लाख  स्क्वायर फिट में विस्तारित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर ने विश्व के सनातियों को आकर्षित किया है। पावन पथ परियोजना पर लगभग 24.2 करोड़, तीनों अंतर्गृही यात्रा का जीर्णोद्धार 3.08 करोड़ रुपये, पंचकोसी परिक्रमा यात्रा के पांच पड़ाव के पर्यटन विकास पर 39.23 करोड़ खर्च हुआ है। कैथी में मारकंडेय महादेव घाट से संगम घाट तक गंगा नदी के किनारे मार्ग, मारकंडेय महादेव मंदिर, कैथी तथा गंगा घाट, कैथी का विकास, स्वर्वेद ध्यान केंद्र, रामेश्वर में पर्यटन विकास कार्य, आभासीय अनुभूति संग्रहालय, मान महल, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में अन्न क्षेत्र का निर्माण एवं गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट तक पर्यटन विकास एवं गंगा दर्शन गेस्ट हाउस आदि शामिल हैं। ओवरऑल टूरिज्म डेवलपमेंट के योजना के अंतर्गत जैन तीर्थंकर चंद्रप्रभु की जन्मस्थली चंद्रावती में भी विकास का कार्य हुआ है। 

गलियों का शहर काशी की गलियों का सौंदर्यीकरण करके  आधुनिक तरीके से विकसित किया गया है। घाटों का सौंदर्यीकरण कर इसे श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। काशी की चार धाम यात्रा, काशी विष्णु यात्रा, द्वादश आदित्य यात्रा, नव दुर्गा, अष्ट भैरव, नव गौरी, विनायक, द्वादश ज्योतिर्लिंग के लिए पावन पथ का निर्माण कार्य, अन्य कई धार्मिक यात्राओं और मार्ग में पड़ने वाले मंदिरो का विकास, रोहनिया, पिंडरा, शिवपुर आदि क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में प्राचीन आस्था के केंद्र मंदिरों, तालाबों, कुंडो आदि का कार्य, सामनेघाट एवं रामनगर में शास्त्रीय घाट का पक्के घाट के रूप में निर्माण। मारकंडेय महादेव मंदिर, सारंग नाथ तालाब, शूलटंकेश्वर मंदिर गंगा घाट, अन्य मंदिरो और घाटों, सारनाथ में लाइट एंड साउंड शो, बुद्धा थीम पार्क, संत शिरोमणि रविदास जी की जन्म स्थली पर जन सुविधा, क्रूज़ बोट का संचालन, लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर पर्यटन सूचना केंद्र, नरसिंह मठ, संकुलधारा मठ,  राजघाट पर चेंजिंग रूम, पिंडरा में माँ भद्रकाली मंदिर का सौंदर्यीकरण आदि कार्य है। 

सारनाथ में पर्यटन का पुनर्विकास हुआ कायाकल्प
भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ का विश्व के धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर विशेष पहचान है। सारनाथ के पूरे क्षेत्र को टूरिस्ट फ्रेंडली बनाया गया है। तथागत की भूमि सारनाथ बौद्ध भिक्षुओं का तीर्थ स्थल माना जाता है। यहाँ विश्व भर से हर साल लाखों पर्यटक आते हैं।  प्रो-पूअर प्रोजेक्ट के तहत विश्व बैंक के अनुदान से ₹72.63 करोड़ से सारनाथ के आसपास विकास का कार्य किया गया है, जिससे अधिक से अधिक पर्यटक यहाँ आकर रुकें और आसपास रहने वाले लोगों की आय बढ़े और रोज़गार के अवसर मिले।

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