काशी में 16 जुलाई से गूंजेगा जगन्नाथ महाप्रभु का जयघोष, 800 साल पुराना मंदिर, 236 वर्ष पुरानी रथयात्रा की अद्भुत विरासत
अस्सी, धूपचंडी और भैरवतालाब में ऐतिहासिक रथयात्रा की 16 जुलाई से होगी शुरुआत
काशी का सबसे प्राचीन मंदिर है प्रह्लाद घाट का 800 वर्ष पुराना जगन्नाथ मंदिर
अस्सी का 236 वर्ष पुराना मंदिर पुरी की परंपरानुसार अनवसर और रथयात्रा का करता है आयोजन
काशीराज परिवार रथ खींचकर भैरवतालाब के मेले का करता है शुभारंभ
रथयात्राओं में हजारों श्रद्धालु शामिल रथ खींचकर प्राप्त करते हैं पुण्य लाभ
रिपोर्ट-ओमकारनाथ
वाराणसी। भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा का नाम लेते ही ओडिशा के पुरी की भव्य परंपरा का स्मरण होता है, लेकिन धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में भी यह उत्सव सदियों से पूरे वैभव, श्रद्धा और लोक परंपरा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष 16 जुलाई से काशी के विभिन्न क्षेत्रों में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्राएं और मेले शुरू होंगे। अस्सी, धूपचंडी और भैरवतालाब की रथयात्राएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनमें से दो स्थानों पर काशी राजपरिवार भी पारंपरिक रूप से शामिल होकर भगवान के रथ का पूजन और दर्शन करेगा।
अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर करीब 236 वर्ष पुराना माना जाता है। यहां पुरी की परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान का स्नान कराया जाता है और इसके बाद 14 दिनों तक अनवसर काल में भगवान को औषधीय काढ़े का भोग अर्पित किया जाता है। 15 जुलाई को भगवान नवयौवन रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। सुबह विशेष श्रृंगार और मंगल आरती के बाद शाम को भगवान भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ डोली यात्रा पर निकलेंगे। इसके अगले दिन से तीन दिवसीय भव्य रथयात्रा मेला शुरू होगा।

धूपचंडी स्थित चित्रकूट मोहल्ले का लक्ष्मीनारायण एवं जगन्नाथ मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है। यहां 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ ऐतिहासिक काष्ठ निर्मित रथ पर विराजमान होकर शहर के प्रमुख मार्गों से नगर भ्रमण करेंगे। मान्यता है कि काशी में भगवान जगन्नाथ अकेले नगर भ्रमण कर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इस रथयात्रा में पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री और नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बी.पी. कोइराला भी शामिल हो चुके हैं। गंगा तट पर स्थित प्रह्लाद घाट का श्री जगन्नाथ मंदिर काशी का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है, जिसका इतिहास लगभग 800 वर्ष पुराना बताया जाता है। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के साथ विराजमान हैं तथा प्रतिदिन परवल, खिचड़ी और रसगुल्ले का विशेष भोग अर्पित किया जाता है।

वहीं भैरवतालाब की करीब 200 वर्ष पुरानी रथयात्रा भी 16 और 17 जुलाई को आयोजित होगी। छह किलोमीटर के दायरे में लगने वाले इस विशाल मेले की शुरुआत काशी राजपरिवार द्वारा रथ खींचकर की जाती है। रथयात्रा रानी बाजार से प्रारंभ होकर लक्ष्मीनारायण मंदिर तक पहुंचती है, जहां हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन करते हैं। काशी में बड़ा गणेश मंदिर मार्ग, शीतला घाट, लल्लापुरा सहित कई स्थानों पर भगवान जगन्नाथ के प्राचीन मंदिर स्थापित हैं। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी काशी की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और लोकजीवन का जीवंत प्रतीक बनी हुई है।

