21 वर्ष पुराने ज्ञानवापी बवाल मामले में सभी आरोपी बरी, अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में किया दोषमुक्त
वाराणसी। वर्ष 2005 में ज्ञानवापी क्षेत्र में हुए चर्चित बवाल और दंगा प्रकरण में एमपी-एमएलए कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। करीब 21 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करते हुए यह फैसला सुनाया।
2 सितंबर 2005 को जुमे की नमाज के दौरान मौलाना बातिन की जांच को लेकर हुई कहासुनी ने देखते ही देखते बड़े विवाद का रूप ले लिया था। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा। मामले में पुलिस द्वारा कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
इस मुकदमे में वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर गिरी, गुलशन कपूर सहित कुल 14 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें हिंदू समाज के प्रतिनिधियों के साथ मुस्लिम व्यापारी भी शामिल थे। आरोपियों का पक्ष रहा कि उन्हें घटनाक्रम में बेवजह फंसाया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान विभिन्न स्तरों पर कानूनी बहस, गवाहों के बयान और साक्ष्यों की जांच की गई। इस दौरान कई सामाजिक एवं राजनीतिक प्रतिनिधिमंडलों ने तत्कालीन केंद्र और प्रदेश सरकारों से मुकदमे के संबंध में हस्तक्षेप की मांग भी की थी।
अंततः मस्जिद इंतजामिया कमेटी और अन्य पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी, अधिवक्ता गुलाम गौश खान तथा अधिवक्ता आशिफ उमर ने अदालत में अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त घोषित कर दिया।

