1 घंटा, 20 हजार लोग, 350 बीघा ज़मीन,3 लाख पौधरोपण करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड  में नाम दर्ज़ करने की तैयारी 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी दौर में इस वृहद् पौधरोपण कार्यक्रम के संबंध में प्रस्तुतीकरण देखेंगे एवं प्रमाण पत्र देंगे

वाराणसी नगर निगम पर्यावरण की शुद्धता और स्वच्छता  के लिए कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है

गंगा पार ,तट पर सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में विशाल ‘शहरी वन’ किया जा रहा विकसित ,शुद्ध ऑक्सीजन बैंक के रूप में करेगा कार्य

शहरी वन' न केवल शहर की आबोहवा को शुद्ध करेगा, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन का नया मॉडल भी बनेगा

यह अभियान वाराणसी के भविष्य के लिए एक निवेश के तौर पर देखा जा रहा है  

यह परियोजना गंगा के किनारों के कटाव को रोकने में करेगा मदद 

तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये देगी, सातवें वर्ष तक पहुंचते-पहुंचते सात करोड़ रुपये वार्षिक तक होने की संभावना है

डोमरी प्रधानमंत्री का पूर्व में गोद लिया हुआ गांव है  

 

वाराणसी। वाराणसी आज एक अनोखा रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। यहाँ 1 घंटे में ,20 हज़ार लोगो द्वारा,3 लाख से अधिक पौधरोपण करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड  में नाम दर्ज़ करने की तैयारी है । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी दौर में इस वृहद्  पौधरोपण  कार्यक्रम के सम्बन्ध में प्रस्तुतीकरण देखेंगे एवं प्रमणपत्र देंगे । नगर निगम द्वारा गंगा पार ,तट पर सुजाबाद डोमरी (डोमरी प्रधानमंत्री का पूर्व में गोद लिया हुआ गांव है ) क्षेत्र में 350 बीघा में एक विशाल ‘शहरी वन’ का विकास किया जा रहा है। शहरी वन' न केवल शहर की आबोहवा को शुद्ध करेगा, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन का नया मॉडल भी बनेगा। ये वन मियावाकी तकनीक से वन विकसित किया जायेगा। यह अभियान वाराणसी के भविष्य के लिए एक निवेश के तौर पर देखा जा रहा है। जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक शुद्ध ऑक्सीजन बैंक के रूप में कार्य करेगी। यह परियोजना गंगा के किनारों होने वाले कटाव को भी मजबूती देगा।

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वाराणसी नगर निगम काशी की आबोहवा,पर्यावरण की शुद्धता औरस्वच्छता के लिए एक कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है। महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए मध्यप्रदेश की एमबीके नामक संस्था से एक समझौता किया गया है जो तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये की आय करायेगी। वहीं सातवें वर्ष तक पहुंचते-पहुंचते सात करोड़ रुपये वार्षिक तक होने की संभावना है। यहां मियावाकी तकनीक के साथ-साथ औषधीय पौधों और फूलों की खेती भी देखने को मिलेगा। यह केवल एक बगीचा नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर इको-सिस्टम विकसित होगा है। यहां मियावाकी वन के साथ-साथ फलों के बाग, आयुर्वेद की खेती और फूलों की खेती का अद्भुत समन्वय है।

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योजना से आर्थिक लाभ
परियोजना के तीसरे वर्ष आम,अमरूद, पपीता,अनार जैसे फलदार पेड़ो और अश्वगंधा, शतावरी, गिलोय और एलोवेरा जैसे औषधीय पौधों तथा गुलाब, चमेली और पारिजात  के फूलों से राजस्व मिलना शुरू हो जाएगा। ऐसे में तीसरे वर्ष निगम को दो करोड़ रुपये मिलेगा। वहीं पांचवें वर्ष पांच करोड़, ,छ्ठे वर्ष छ्ह करोड़ तथा सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुंचने का अनुमान है।

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सिंचाई की स्मार्ट व्यवस्था 
 सिंचाई के लिए यहां पांच बोरवेल स्थापित किए गए हैं, मार्च-जून में प्रचंड गर्मी में पौधों को पानी  देने के लिए सप्ताह में तीन बार 45 मिनट की विशेष सिंचाई का शेड्यूल तय किया गया है।

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मार्च में वृक्षारोपण का वैज्ञानिक व भौगोलिक कारण 

विशेषज्ञों के मुताबिक मार्च का पहला हफ्ता परियोजना के लिए सबसे अनुकूल है। मानसून आने से पहले पौधों को रोपित करने से उनकी जड़ों को जमने का पूरा समय मिल जाता है, जिससे उनके जीवित रहने की दर काफी बढ़ जाती है।

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 मिट्टी का कटाव के लिए सुरक्षा चक्र
 गंगा तट पर स्थित होने के कारण यहां मिट्टी के कटाव का खतरा रहता है। बरसात से पहले फैली जड़ें मिट्टी को बांधकर कटाव रोकने में सुरक्षा चक्र का काम करेंगी। अप्रैल-मई की भीषण गर्मी शुरू होने से पहले पौधे नए वातावरण में ढल जाते हैं।

 

विविधता एवं प्रजातियों का चयन
इस वन में बाँस, कचनार, महुआ,और हरसिंगार जैसे कुल 27 प्रकार के देशी पेड़ शामिल हैं। यहां शीशम और अर्जुन जैसी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है, जो नदी किनारे के वातावरण और अस्थायी जलभराव को सहने में सक्षम हैं।

परियोजना एक नजर में
 

पौधों की संख्या-  3,17,120
पाइपलाइन का जाल: 10,827 मीटर
आधुनिक सिंचाई: 360 रेनगन स्प्रिंकलर
कुल अनुमानित आय: 19.80 करोड़ रुपये (5 वर्षों में)
सिंचाई नेटवर्क 10827 मीटर पाइपलाइन और 10 बोरवेल
तकनीकी उपकरण 360 'रेन गन' स्प्रिंकलर सिस्टम
चार किलोमीटर पाथवे

पौधे के प्रकार ,नाम और संख्या
 

1. छायादार और वन प्रजातियां
शीशम: 35,171
सागौन: 14,371
अर्जुन: 13,671
सप्तपर्णी: 13,071
बांस: 12,371
पीपल: 11,421
महुआ: 10,771
शीशम (हाइब्रिड): 14,071
महोगनी: 11,021
बकैन: 9,971
चिलबिल: 8,371
कैजुराइना/झाऊ: 7,371
चितवन: 6,071

 

2. फलदार वृक्ष
अमरूद: 24,121
आम: 19,421
अनार: 14,771
शहतूत: 12,771
नींबू: 10,371
करौंदा: 8,071
बेल: 3,971

3. फूलों वाले और सजावटी पौधे
कचनार: 11,771
चाँदनी: 9,371
गुड़हल: 9,071
हरसिंगार/पारिजात: 7,771
बोतल ब्रश: 7,071
मनोकामिनी: 6,371
एलिका: 4,821
जंगल जलेबी: 7,022

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