यमुनानगर:पैरा खेलों में स्वर्णिम छलांग लगाने वाले जयवीर की जिद्द बनी प्रेरणा
यमुनानगर, 03 जनवरी (हि.स.)। जीवन जब अचानक सबसे बड़ा झटका दे दे, तब इंसान या तो टूट जाता है या इतिहास रच देता है। जयवीर कुमार ने दूसरा रास्ता चुना। सेना में चयन जैसी बड़ी उपलब्धि के बाद एक सड़क हादसे में जब उनका एक पैर कट गया, तो लगा जैसे सारे सपने वहीं थम जाएंगे। लेकिन जयवीर ने इसे किस्मत की हार नहीं, बल्कि नई शुरुआत का मोड़ बनाया।
30 वर्षीय जयवीर कुमार, मूल रूप से हरियाणा के चरखी दादरी जिले से हैं और वर्तमान में रेलवे के जगाधरी वर्कशॉप में सहायक पद पर कार्यरत हैं। हाल ही में उन्होंने पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में आयोजित दूसरी हरियाणा ओपन स्टेट पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर एक बार फिर साबित कर दिया कि असली शक्ति शरीर में नहीं, संकल्प में होती है। जयवीर का जीवन वर्ष 2013 में उस वक्त पूरी तरह बदल गया, जब भारतीय सेना में चयन के कुछ ही समय बाद एक भीषण सड़क हादसे में उनकी दाहिनी टांग गंवानी पड़ी। कई महीनों तक बिस्तर पर रहने और वर्षों तक मानसिक संघर्ष झेलने के बाद वे टूट जरूर गए थे, लेकिन हार नहीं मानी। एक मित्र के सहयोग और आत्मविश्वास ने उन्हें दोबारा खड़ा किया। उन्होंने पैरा ओलंपिक को लक्ष्य बनाकर कठिन अभ्यास शुरू किया। शुरुआती दौर में हर कदम चुनौती था, लेकिन निरंतर मेहनत ने उन्हें नई पहचान दी। जयवीर ने पैरा ताइक्वांडो ही नहीं, बल्कि पैरा फुटबॉल, भाला फेंक और योगासन जैसे खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कई पदक अपने नाम किए। अब तक जयवीर 2018 में राज्यस्तरीय पैरा एथलेटिक्स भाला फेंक में स्वर्ण, 2019 में रजत, 2022 में राज्य पैरा फुटबॉल में रजत, 2023 में राज्यस्तरीय योगासन में स्वर्ण, 2024 में राज्य फुटबॉल में रजत और 2024 की नेशनल फुटबॉल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत चुके हैं। कभी 400 मीटर दौड़ के राज्यस्तरीय खिलाड़ी रहे जयवीर आज पैरा खेलों के बहुआयामी चैंपियन बन चुके हैं। उनका सपना अब भी अधूरा नहीं है—वे पैरा ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर तिरंगा लहराना चाहते हैं। जयवीर की कहानी उन लाखों लोगों के लिए संदेश है, जो हालात से डरकर रुक जाते हैं। वह साबित करते हैं कि इंसान अंगों से नहीं, आत्मबल से पराजित होता है-और अगर जिद हो, तो हर असंभव संभव बन सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

