शीर्ष एयर राइफल निशानेबाज एलावेनिल वलारिवन ने कहा- हर दिन अभ्यास ने मुझे संभाले रखा

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शीर्ष एयर राइफल निशानेबाज एलावेनिल वलारिवन ने कहा- हर दिन अभ्यास ने मुझे संभाले रखा


शीर्ष एयर राइफल निशानेबाज एलावेनिल वलारिवन ने कहा- हर दिन अभ्यास ने मुझे संभाले रखा


नई दिल्ली, 04 अगस्त (हि.स.)। विश्व की नंबर एक खिलाड़ी रह चुकीं देश की शीर्ष एयर राइफल निशानेबाज एलावेनिल वलारिवन ने अपने करियर के संघर्ष, चोटों से वापसी और भविष्य के लक्ष्यों पर खुलकर बात की।

हाल ही में आईएसएसएफ विश्व कप 2026 (हांगझोऊ) में हिस्सा लेने वाली 26 वर्षीय निशानेबाज ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि निरंतर अभ्यास, परिवार का साथ और खेल के प्रति उनका प्रेम ही उन्हें कठिन दौर से बाहर लेकर आया।

टोक्यो ओलंपिक-2020 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी एलावेनिल महिला 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजों में शामिल रही हैं। उनके नाम आईएसएसएफ विश्व कप, आईएसएसएफ विश्व कप फाइनल, आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप और एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप में कई स्वर्ण पदक दर्ज हैं।

अपने करियर की शुरुआत को याद करते हुए एलावेनिल ने कहा, मेरे परिवार में पहले कोई खिलाड़ी नहीं था, लेकिन घर में खेलों को हमेशा प्रोत्साहन मिला। मैंने शूटिंग से पहले एथलेटिक्स, जूडो, बैडमिंटन, हैंडबॉल, कबड्डी सहित कई खेल खेले। संयोग से शूटिंग शुरू हुई और कब यह मेरा पेशा बन गई, पता ही नहीं चला।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें सामाजिक पूर्वाग्रहों का भी सामना करना पड़ा। एलावेनिल ने कहा, लोग पूछते थे कि एक लड़की हाथ में बंदूक लेकर क्यों घूम रही है। लेकिन मेरे लिए सबसे अहम मेरे माता-पिता का विश्वास और खुद पर भरोसा था। आलोचना हमेशा रहेगी, लेकिन मैंने उसे कभी अपनी राह तय नहीं करने दी।

एलावेनिल ने बताया कि उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौती प्रतियोगिताओं से नहीं, बल्कि गंभीर चोटों से आई। उन्होंने कहा, 2017 में घुटने की गंभीर चोट के कारण मैं बिना रुके पांच शॉट भी नहीं लगा पाती थी। इसके बाद 2022 में गर्दन और कमर की डिस्क में समस्या हो गई। कई बार लगा कि शायद अब शूटिंग जारी नहीं रख पाऊंगी।

उन्होंने आगे कहा, मुझे सबसे ज्यादा सहारा हर दिन अभ्यास के लिए पहुंचने से मिला। चाहे मैं सिर्फ एक घंटे ही अभ्यास कर पाती और फिर पुनर्वास के लिए जाती, लेकिन मैं खेल से जुड़े रहना चाहती थी। शूटिंग के प्रति मेरा प्रेम ही मुझे सबसे कठिन दौर से बाहर लेकर आया।

एलावेनिल ने अपने विकास में गगन नारंग स्पोर्ट्स प्रमोशन फाउंडेशन और गन फॉर ग्लोरी अकादमी की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा, 2014 में गुजरात सरकार की एक पहल के जरिए मैं गन फॉर ग्लोरी अकादमी से जुड़ी। तब से कोच नेहा चव्हाण के साथ लगातार काम कर रही हूं, जबकि गगन नारंग हमेशा मेरे मार्गदर्शक रहे हैं। हमने मिलकर मेरे खेल के हर पहलू को बेहतर बनाने पर काम किया है।

आगामी एशियाई खेलों की तैयारियों पर एलावेनिल ने कहा, मैं बहुत आगे की नहीं सोच रही हूं। मेरी कोच और मैं हर दिन अपने खेल के छोटे-छोटे पहलुओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। पूरे सत्र की योजना तैयार है, लेकिन फिलहाल हमारा लक्ष्य हर दिन पहले से बेहतर बनना है।

वर्तमान में एलावेनिल नेहा चव्हाण के मार्गदर्शन और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता गगन नारंग के मेंटरशिप में गन फॉर ग्लोरी अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं और आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीतने के लक्ष्य पर फोकस कर रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

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