मध्य प्रदेश बना भारतीय हॉकी की प्रतिभाओं का केंद्र, 16 वर्षों में हासिल किए 29 पदक

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मध्य प्रदेश बना भारतीय हॉकी की प्रतिभाओं का केंद्र, 16 वर्षों में हासिल किए 29 पदक


भोपाल, ग्वालियर की अकादमियों ने तैयार की मजबूत खिलाड़ी शृंखला

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (हि.स.)। हॉकी मध्य प्रदेश ने पिछले 16 वर्षों में शानदार प्रदर्शन करते हुए हॉकी इंडिया की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कुल 29 पदक जीतकर खुद को भारतीय हॉकी में एक मजबूत प्रतिभा केंद्र के रूप में स्थापित किया है। इस सफलता के पीछे भोपाल और ग्वालियर स्थित मध्य प्रदेश हॉकी अकादमियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

हाल ही में 16वीं हॉकी इंडिया सब जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप 2026 में राज्य की पुरुष और महिला दोनों टीमों ने रजत पदक जीतकर अपनी मजबूत जमीनी संरचना का एक बार फिर प्रदर्शन किया।

महिला वर्ग में दबदबा

मध्य प्रदेश की महिला हॉकी टीमों ने विशेष रूप से प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। पिछले 16 वर्षों में महिला वर्ग में कुल 23 पदक (स्वर्ण, रजत और कांस्य) हासिल किए गए हैं।

जूनियर महिला टीम ने 6 पदक (3 स्वर्ण, 3 रजत), जबकि सब जूनियर महिला टीम ने 10 पदक (3 स्वर्ण, 5 रजत, 2 कांस्य) जीते हैं। वहीं, सीनियर महिला टीम ने 7 पदक (2 स्वर्ण, 2 रजत, 3 कांस्य) अपने नाम किए, जिसमें 2021 और 2023 में खिताब जीतना शामिल है।

पुरुष वर्ग में भी मजबूत प्रदर्शन

पुरुष वर्ग में भी मध्य प्रदेश ने 6 पदक (2 स्वर्ण, 3 रजत, 1 कांस्य) जीते हैं। जूनियर पुरुष टीम ने 2 पदक (1 स्वर्ण, 1 कांस्य), सब जूनियर पुरुष टीम ने 3 पदक (1 स्वर्ण, 2 रजत) और सीनियर पुरुष टीम ने 2025 में पहला रजत पदक हासिल किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे खिलाड़ी

इस मजबूत प्रणाली का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देता है। पुरुष वर्ग में विवेक सागर प्रसाद और नीलकांत शर्मा, जबकि महिला वर्ग में सुषिला चानू और ईशिका चौधरी जैसे खिलाड़ी इसी अकादमी प्रणाली से निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचे हैं।

मध्य प्रदेश की सफलता का प्रमुख कारण उसका संगठित और संस्थागत विकास मॉडल है, जहां सब जूनियर और जूनियर स्तर पर तैयार खिलाड़ी सीनियर टीम तक सहज रूप से पहुंचते हैं।

वरिष्ठ कोच परमजीत सिंह ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कई ऐसे खिलाड़ियों को तैयार किया, जो 2016 ओलंपिक में भारतीय महिला टीम का हिस्सा रहे। इसके लिए उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 2016 में लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से नवाजा गया।

परमजीत सिंह ने कहा, “हमारा लक्ष्य राज्य के भीतर से प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें बेहतर सुविधाएं और वैज्ञानिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। हमारी अकादमी में ऐसे बच्चों को भी मौका दिया जाता है, जिन्हें पहले हॉकी का अनुभव नहीं होता। हम उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं, उपकरण और पोषण उपलब्ध कराते हैं।”

हॉकी मध्य प्रदेश के सचिव लोक बहादुर ने बताया कि यह सफलता पूरे राज्य के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें भोपाल और ग्वालियर की अकादमियों में विकसित किया जाता है, जिससे एक मजबूत खिलाड़ी श्रृंखला तैयार होती है।

मध्य प्रदेश की यह मॉडल प्रणाली न केवल राज्य को लगातार सफलता दिला रही है, बल्कि भारतीय हॉकी के लिए भी भविष्य के सितारे तैयार कर रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

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