एशियाई खेल 2026: 44 साल बाद महिला हॉकी में स्वर्ण जीतने के इरादे से उतरेगा भारत

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एशियाई खेल 2026: 44 साल बाद महिला हॉकी में स्वर्ण जीतने के इरादे से उतरेगा भारत


नई दिल्ली, 01 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय महिला हॉकी टीम शुक्रवार को एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक मुकाबले में गत चैंपियन चीन के खिलाफ उतरेगी। भारत की नजरें 44 साल बाद महिला हॉकी में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतने और लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक के लिए क्वालीफिकेशन हासिल करने पर होंगी।

भारत ने 1982 में पहली और अब तक एकमात्र बार एशियाई खेलों में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद टीम 1998 और 2018 में फाइनल तक पहुंची लेकिन दोनों मौकों पर उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ा। 1998 के फाइनल में भारत को दक्षिण कोरिया और 2018 में जापान के खिलाफ हार मिली थी। अब भारतीय टीम की नई पीढ़ी इस लंबे इंतजार को खत्म करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

भारतीय टीम का 2026 में अब तक का प्रदर्शन शानदार रहा है। टीम ने इस साल एफआईएच नेशंस कप का खिताब जीता और बेल्जियम तथा नीदरलैंड्स में आयोजित एफआईएच विश्वकप में 52 साल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया। विश्वकप में भारत ने दुनिया की चौथे नंबर की टीम चीन को एम्स्टर्डम में गोलरहित ड्रॉ पर रोका था।

यह नतीजा शुक्रवार के फाइनल से पहले भारत का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होगा। दोनों टीमें अब तक टूर्नामेंट में अजेय हैं और अपने-अपने पूल में सभी मुकाबले जीतकर शीर्ष पर रही हैं। हालांकि, सेमीफाइनल में दोनों को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।

गत चैंपियन चीन को पहले सेमीफाइनल में मेजबान जापान के खिलाफ निर्धारित समय में कोई गोल नहीं मिला और मुकाबला 0-0 पर समाप्त हुआ। इसके बाद चीन ने शूटआउट में 4-2 से जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई।

भारत को भी दक्षिण कोरिया के खिलाफ कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा। दक्षिण कोरियाई रक्षा ने लंबे समय तक भारतीय हमलावरों को गोल करने से रोके रखा लेकिन तीसरे क्वार्टर के अंतिम हिस्से में इशिका ने गोल कर भारत को बढ़त दिलाई। कप्तान सलीमा टेटे ने चौथे क्वार्टर में दूसरा गोल कर भारत की जीत सुनिश्चित कर दी।

दक्षिण कोरिया के खिलाफ सेमीफाइनल जीत के बाद भारत के मुख्य कोच स्वोर्ड मारिज्ने ने कहा, “हमारे लिए शांत रहना और धैर्य बनाए रखना वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण था और मुझे लगता है कि हमने यह बहुत अच्छी तरह किया।”

चीन के खिलाफ फाइनल को लेकर मारिज्ने ने कहा, “हममें आत्मविश्वास है लेकिन हम यह भी समझते हैं कि चीन बहुत अच्छी टीम है। वे अभी भी दुनिया की नंबर चार टीम हैं। हमने विश्वकप में उनसे बेहतर प्रदर्शन किया था लेकिन फिर भी उनके पास काफी अनुभव है... सेमीफाइनल के प्रदर्शन में कुछ चीजें हैं जिनमें हम सुधार कर सकते हैं और इसी सोच के साथ हम चीन के खिलाफ फाइनल में उतरेंगे।”

भारत के अभियान में मजबूत रक्षापंक्ति के साथ आक्रामक विविधता भी देखने को मिली है। गोलकीपर सविता और बिचू देवी ने गोल के सामने मजबूत प्रदर्शन किया है। वहीं, भारत ने पेनल्टी कॉर्नर और मैदानी खेल दोनों के जरिए गोल करने की क्षमता दिखाई है। दीपिका छह मैचों में 21 गोल के साथ टूर्नामेंट की शीर्ष स्कोरर हैं, जिसमें 19 गोल पेनल्टी कॉर्नर से आए हैं। नवनीत के नाम 10 गोल हैं, जिनमें सात मैदानी गोल हैं।

चीन के पास भी मजबूत आक्रमण है। झोंग जियाकी नौ गोल के साथ अपनी टीम की शीर्ष स्कोरर हैं, जबकि चेन यी और झांग यिंग ने सात-सात गोल किए हैं।

फाइनल में चुनौती अलग होगी। एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम को लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक के लिए क्वालीफिकेशन भी मिलेगा। ऐसे में मुकाबले में दबाव के बीच संयम बनाए रखना और निर्णायक क्षणों में मौकों को भुनाना अहम होगा।

44 साल के लंबे इंतजार के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम इतिहास दोहराने से अब सिर्फ एक जीत दूर है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

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